गुरु in the पंचम भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Children & Intellect
शास्त्रीय श्लोक
पंचम भाव में गुरु जातक को सलाहकार या मंत्री, धनवान, संतान से आशीर्वादित और यश से संपन्न बनाता है। बुद्धि और आध्यात्मिक पुण्य असाधारण रूप से प्रबल हैं।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 105-106
आधुनिक व्याख्या
ज्ञान, संतान और रचनात्मक बुद्धि के लिए असाधारण स्थिति। स्वाभाविक सलाहकार, शिक्षक या आध्यात्मिक मार्गदर्शक। संतान महान आनंद लाती है। पूर्वजन्म का पुण्य सौभाग्य के रूप में प्रकट होता है।
कुंजी शब्द
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