गुरु in the सप्तम भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Marriage & Partnership
शास्त्रीय श्लोक
सप्तम भाव में गुरु गुणवान और सुंदर पत्नी देता है, जातक को वाक्पटु और पिता से श्रेष्ठ बनाता है। भाग्यशाली और नैतिक साझेदारियां संकेतित हैं।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 109-110
आधुनिक व्याख्या
बुद्धिमान, शिक्षित और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के साथी से विवाह। व्यापारिक साझेदारियां नैतिक और लाभदायक हैं। निष्पक्ष व्यवहार से सार्वजनिक प्रतिष्ठा बढ़ती है। विवाह आपके विश्वदृष्टिकोण को विस्तारित करता है।
कुंजी शब्द
marriagespouseethicspartnershipsreputation