शनि in the षष्ठ भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Enemies & Disease
शास्त्रीय श्लोक
षष्ठ भाव में शनि जातक को पेटू, धनवान, शत्रुओं का विजेता और अहंकारी बनाता है। सेवा के माध्यम से दीर्घकालिक बाधाओं पर विजय और क्रमिक मान्यता संकेतित है।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 155-156
आधुनिक व्याख्या
निरंतर प्रयास से चिरकालिक शत्रुओं, ऋणों और रोगों पर विजय के लिए उत्कृष्ट। श्रम, सेवा या संरचित कार्य वातावरण में सफलता। अनुशासित दिनचर्या से स्वास्थ्य सुधरता है।
कुंजी शब्द
serviceenemiesdisciplinechronic health