शनि in the चतुर्थ भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Home & Mother
शास्त्रीय श्लोक
चतुर्थ भाव में शनि जातक को गृह, भूमि, माता, मित्र और सुख से वंचित करता है। घरेलू सुख में विलम्ब होता है किन्तु निरंतर प्रयास से अंततः स्थिर संपत्ति मिलती है।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 151-152
आधुनिक व्याख्या
घरेलू सुख में विलम्ब — संपत्ति स्वामित्व जीवन में देर से आता है। माता से संबंध कर्तव्य से भारित हो सकता है। पुराने, पारम्परिक या संरचनात्मक रूप से मजबूत घर आकर्षित करते हैं। आंतरिक शांति के लिए आजीवन प्रयास आवश्यक है।
कुंजी शब्द
delayed propertymotherdutytradition