वाराणसी · Uttar Pradesh
रक्षाबन्धन 2026वाराणसी में
वाराणसी के निर्देशांकों (25.32°N, 82.97°E) के लिए सटीक पूजा समय
प्रमुख समय
त्योहार की तिथि
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
18:21
यह तिथि क्यों?
Raksha Bandhan उदय तिथि नियम का पालन करता है — जिस दिन आवश्यक तिथि सूर्योदय के समय व्याप्त हो, उस दिन त्योहार मनाया जाता है। यह धर्मसिन्धु का सामान्य नियम है।
पूजा विधि
पूजा के चरण
- 1
आरती थाली की तैयारी
बहन आरती की थाली में जलता दीपक, रोली, अक्षत, मिश्री, एक फूल और राखी सजाती है। भाई और बहन दोनों स्नान करके स्वच्छ शुभ वस्...
- 2
भाई की आरती
बहन जलते दीपक की थाली को भाई के चेहरे के चारों ओर तीन बार दक्षिणावर्त घुमाकर उनकी आरती करती है।
- 3
माथे पर तिलक
बहन अनामिका से भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाती है, फिर तिलक पर अक्षत (चावल के दाने) चिपकाती है। यह शुभ आशीर्वाद का प्र...
फल (लाभ)
भाई-बहन के पवित्र बन्धन को मजबूत करता है, भाई की दीर्घायु और समृद्धि सुनिश्चित करता है, दोनों भाई-बहनों को दिव्य रक्षा प्रदान करता है, और कुल की आशीर्वाद प्राप्ति होती है
गणना प्रमाण — पारदर्शी लेखा परीक्षा
देवता
लक्ष्मी / कृष्ण
कथा एवं इतिहास
भागवत पुराण में, जब विष्णु ने राजा बलि से तीनों लोक जीते, लक्ष्मी ने बलि की कलाई पर धागा बाँधा। द्रौपदी ने कृष्ण के घायल कलाई पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बाँधा, और कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया।
कैसे मनाएँ
बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं। भाई उपहार देते हैं और रक्षा का वचन देते हैं।
महत्व
भाई-बहन के पवित्र बन्धन और रक्षा के कर्तव्य का उत्सव।