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लक्ष्मी / कृष्ण
भागवत पुराण में, जब विष्णु ने राजा बलि से तीनों लोक जीते, लक्ष्मी ने बलि की कलाई पर धागा बाँधा। द्रौपदी ने कृष्ण के घायल कलाई पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बाँधा, और कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया।
भाई-बहन के पवित्र बन्धन और रक्षा के कर्तव्य का उत्सव।
बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं। भाई उपहार देते हैं और रक्षा का वचन देते हैं।
रक्षा बन्धन श्रावण पूर्णिमा को अपराह्न (दोपहर बाद) में किया जाता है। भद्रा काल से सख्ती से बचना चाहिए — भद्रा में राखी बाँधना अशुभ होता है। भद्रा का समय पंचांग से देखें और उससे पूर्णतः बचें।
इस शुभ श्रावण पूर्णिमा पर, मैं अपने भाई की कलाई पर यह रक्षा (सूत्र) बाँधती हूँ, उनकी दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करती हूँ। प्रेम और रक्षा का यह पवित्र बन्धन सदा बना रहे।
बहन आरती की थाली में जलता दीपक, रोली, अक्षत, मिश्री, एक फूल और राखी सजाती है। भाई और बहन दोनों स्नान करके स्वच्छ शुभ वस्त्र पहनें।
बहन जलते दीपक की थाली को भाई के चेहरे के चारों ओर तीन बार दक्षिणावर्त घुमाकर उनकी आरती करती है।
बहन अनामिका से भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाती है, फिर तिलक पर अक्षत (चावल के दाने) चिपकाती है। यह शुभ आशीर्वाद का प्रतीक है।
बहन रक्षा सूत्र मन्त्र पढ़ते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है। भाई अपनी हथेली खुली और ऊपर की ओर रखते हैं। यह रक्षा बन्धन का मूल अनुष्ठान है।
रक्षा सूत्र मन्त्र
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
बहन भाई को मिश्री या मिठाई खिलाती है, और भाई भी बहन को मिठाई खिलाता है। इससे बन्धन मधुर होता है।
भाई बहन को उपहार (परम्परागत रूप से धन या सोना) देता है और जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देता है। वह आशीर्वाद स्वरूप उसके पैर या सिर छूता है।
परिवार मिलकर मिठाई बाँटता है और उत्सव मनाता है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों को मिठाई बाँटें।
भाई और बहन दोनों मिलकर एक-दूसरे के कल्याण, दीर्घायु और सुख की प्रार्थना करते हैं। बहन भाई की रक्षा की प्रार्थना करती है; भाई बहन की समृद्धि की प्रार्थना करता है।
रक्षा सूत्र मन्त्र
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
yena baddho balī rājā dānavendro mahābalaḥ | tena tvāmanubadhnāmi rakṣe mā cala mā cala ||
जिस बन्धन से महाबली दानवराज बलि बाँधे गए थे, उसी बन्धन से मैं तुम्हें बाँधती हूँ। हे रक्षा, डिगो मत, डिगो मत!
रक्षा बन्धन प्रार्थना
भ्रातः सदा सुखी भव, चिरञ्जीवी भव। आयुष्मान् भव, यशस्वी भव॥
bhrātaḥ sadā sukhī bhava, cirañjīvī bhava | āyuṣmān bhava, yaśasvī bhava ||
हे भाई, सदा सुखी रहो, चिरञ्जीवी रहो। आयुष्मान रहो, यशस्वी रहो।
रक्षा मन्त्र
ॐ सर्वेभ्यो भयेभ्यो रक्ष रक्ष स्वाहा
oṃ sarvebhyo bhayebhyo rakṣa rakṣa svāhā
हे भगवान, सभी भयों से रक्षा करो — रक्षा करो, रक्षा करो! स्वाहा।
॥ राखी की आरती ॥ ॐ जय श्री राखी माता, मैया जय श्री राखी माता। भाई बहन के प्रेम की, रक्षा का नाता॥ ॐ जय श्री राखी माता॥ कलाई पर राखी सजाकर, टीका रोली लगाऊँ। मिठाई खिलाकर भैया को, स्नेह से गले लगाऊँ॥ ॐ जय श्री राखी माता॥ रक्षासूत्र बाँधकर, मंगलकामना करती। भाई की दीर्घायु के लिए, प्रभु से प्रार्थना करती॥ ॐ जय श्री राखी माता॥ राखी की आरती जो कोई, भाई बहन गावें। सुख सम्पत्ति समृद्धि, सदा ही पावें॥ ॐ जय श्री राखी माता॥
|| rākhī kī āratī || oṃ jaya śrī rākhī mātā, maiyā jaya śrī rākhī mātā | bhāī bahana ke prema kī, rakṣā kā nātā || oṃ jaya śrī rākhī mātā || kalāī para rākhī sajākara, ṭīkā rolī lagāūṃ | miṭhāī khilākara bhaiyā ko, sneha se gale lagāūṃ || oṃ jaya śrī rākhī mātā || rakṣāsūtra bāṃdhakara, maṅgalakāmanā karatī | bhāī kī dīrghāyu ke lie, prabhu se prārthanā karatī || oṃ jaya śrī rākhī mātā || rākhī kī āratī jo koī, bhāī bahana gāveṃ | sukha sampatti samṛddhi, sadā hī pāveṃ || oṃ jaya śrī rākhī mātā ||
मिश्री, नारियल, बर्फी, पेड़ा और मौसमी फल
भाई-बहन के पवित्र बन्धन को मजबूत करता है, भाई की दीर्घायु और समृद्धि सुनिश्चित करता है, दोनों भाई-बहनों को दिव्य रक्षा प्रदान करता है, और कुल की आशीर्वाद प्राप्ति होती है