लखनऊ · Uttar Pradesh
जन्माष्टमी 2026लखनऊ में
लखनऊ के निर्देशांकों (26.85°N, 80.95°E) के लिए सटीक पूजा समय
प्रमुख समय
त्योहार की तिथि
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
18:23
यह तिथि क्यों?
निशीथ काल (मध्यरात्रि) नियम: जिस दिन अष्टमी तिथि निशीथ काल में व्याप्त हो, उस दिन मनाया जाता है। भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ।
तिथि निर्धारण नियम
निशीथ काल (मध्यरात्रि) में तिथि व्याप्त होनी चाहिए। महाशिवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों के लिए प्रयुक्त।
स्रोत: धर्मसिन्धु एवं निर्णयसिन्धु — शास्त्रीय काल-व्याप्ति पद्धति
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- बाल कृष्ण मूर्ति (बाल गोपाल)
- झूला (पालना)
- माखन (ताजा मक्खन)
- मिश्री (खड़ी शक्कर)
- तुलसी के पत्ते
पूजा के चरण
- 1
निर्जला/फलाहार व्रत (दिनभर का उपवास)
सूर्योदय से पूर्ण व्रत रखें। कठिन व्रती निर्जला (बिना जल) रखते हैं, अन्य फलाहार (फल, दूध, मेवे) ले सकते हैं। व्रत मध्यरा...
- 2
झूला सजाना
पालने/झूले को फूलों, आम के पत्तों और रंगीन कपड़े से सजाएँ। अन्दर छोटा गद्दा और तकिया रखें। यह मध्यरात्रि में बालकृष्ण का...
- 3
पूजा मण्डप सज्जा
कृष्ण मूर्ति, मोर पंख, बाँसुरी और प्रसाद सहित पूजा क्षेत्र सजाएँ। वेदी के पास झूला रखें। पंचामृत सामग्री, माखन-मिश्री और...
व्रत फल (उपवास के लाभ)
भगवान कृष्ण के प्रति परम भक्ति (प्रेम भक्ति), जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति (मोक्ष), जन्मों-जन्मों के संचित पापों का नाश, गोलोक (कृष्ण का शाश्वत धाम) की प्राप्ति, और भगवान श्री कृष्ण — पूर्ण अवतार — की दिव्य कृपा
गणना प्रमाण — पारदर्शी लेखा परीक्षा
देवता
भगवान कृष्ण
कथा एवं इतिहास
भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में मध्यरात्रि को देवकी और वसुदेव के घर हुआ। अत्याचारी कंस ने भविष्यवाणी के बाद उन्हें कैद किया था। कृष्ण के जन्म पर सभी पहरेदार सो गए, बेड़ियाँ टूट गईं।
कैसे मनाएँ
मध्यरात्रि तक उपवास (कृष्ण का जन्म समय)। मध्यरात्रि में भजन-कीर्तन के साथ पूजा। 56 भोग तैयार करें। बाल कृष्ण की मूर्ति को झूला झुलाएँ।
महत्व
भगवद्गीता के वक्ता परमात्मा का जन्म। कृष्ण दिव्य प्रेम, ब्रह्माण्डीय ज्ञान और कर्मयोग के प्रतीक हैं।
व्रत
मध्यरात्रि तक कठोर व्रत। मध्यरात्रि पूजा के बाद प्रसाद से पारण।