लखनऊ · Uttar Pradesh
हरतालिका तीज 2026लखनऊ में
लखनऊ के निर्देशांकों (26.85°N, 80.95°E) के लिए सटीक पूजा समय
प्रमुख समय
त्योहार की तिथि
रविवार, 13 सितंबर 2026
सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
18:13
यह तिथि क्यों?
मध्याह्न नियम: जिस दिन तृतीया तिथि मध्याह्न काल में व्याप्त हो, उस दिन मनाया जाता है। दिन में मिट्टी की शिव-पार्वती मूर्ति की पूजा के साथ व्रत।
गणना प्रमाण — पारदर्शी लेखा परीक्षा
देवता
भगवान शिव एवं देवी पार्वती
पौराणिक कथा
जब देवी पार्वती के पिता हिमालय ने उनका विवाह विष्णु से तय किया, पार्वती विचलित हुईं क्योंकि उन्होंने केवल शिव से विवाह का संकल्प लिया था। उनकी सखी ने उन्हें हर लिया — "हरतालिका" का अर्थ है "सखी का अपहरण करने वाली"। घने वन में पार्वती ने मिट्टी का शिवलिंग बनाकर कठोर तपस्या की। शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए और पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया।
कैसे मनाएँ
महिलाएँ भाद्रपद शुक्ल तृतीया को कठोर निर्जला व्रत रखती हैं। मिट्टी या रेत से शिव-पार्वती की मूर्ति बनाकर मध्याह्न काल में फूल, बेलपत्र और फलों से पूजा करती हैं। रात भर जागरण करती हैं। अगली सुबह मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। अविवाहित कन्याएँ अच्छे वर के लिए और विवाहित महिलाएँ सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं।
महत्व
हरतालिका तीज हिन्दू महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है, विशेषकर उत्तर भारत, महाराष्ट्र और राजस्थान में। यह पार्वती की शिव के प्रति अटल भक्ति और स्त्री संकल्प की शक्ति का उत्सव है। दाम्पत्य सुख और पति की दीर्घायु के लिए अत्यन्त शक्तिशाली व्रत माना जाता है।
व्रत
सूर्योदय से अगली सुबह तक कठोर निर्जला व्रत। हिन्दू परम्परा के सबसे कठोर स्त्री व्रतों में से एक। मिट्टी की शिव-पार्वती मूर्तियों के विसर्जन के बाद पारण।