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हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया (भाद्रपद में बढ़ते चन्द्रमा का तीसरा दिन) को पड़ती है। पूजा प्रदोष काल (सायं सन्ध्या) में होती है। निर्जला व्रत पूर्व सन्ध्या से अगली प्रातः सूर्योदय तक रहता है।
इस पवित्र भाद्रपद शुक्ल तृतीया पर, अपने पति की दीर्घायु और कल्याण तथा शाश्वत वैवाहिक सुख के लिए, मैं भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा एवं निर्जला हरतालिका तीज व्रत का संकल्प करती हूँ।
सूर्योदय से पहले उठें और शुद्धि स्नान करें। 16 श्रृंगार लगाएँ — यह तीज परम्परा का अनिवार्य भाग है। सुहागिन स्त्रियाँ लाल या हरी साड़ी/वस्त्र पहनें।
मिट्टी, रेत या गोबर से भगवान शिव (शिवलिंग रूप में) और देवी पार्वती की मूर्तियाँ बनाएँ। इन्हें फूलों से सजे केले के पत्ते पर रखें। कुछ परम्पराओं में साथ में गणेश की छोटी मूर्ति भी बनाते हैं।
मूर्तियों के सामने बैठें और निर्जला व्रत का विधिवत् संकल्प लें। आवाहन मन्त्रों से मिट्टी की मूर्तियों में शिव-पार्वती का आवाहन करें। मूर्तियों पर गंगाजल छिड़कें।
शिव-पार्वती की षोडशोपचार पूजा करें: शिव को बेलपत्र, पार्वती को फूल और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। चन्दन लगाएँ, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। पार्वती को प्रतीकात्मक रूप में सभी 16 श्रृंगार अर्पित होते हैं।
हरतालिका तीज व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कथा बताती है कि कैसे पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की, और उनकी सखी ने उन्हें वन में ले जाकर (हरतालिका = ले जाने वाली) उनकी सहायता की।
रुद्राक्ष माला से पार्वती मन्त्र का 108 बार जप करें। अपने पति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। अविवाहित स्त्रियाँ अच्छे पति की कामना कर सकती हैं।
पार्वती सौभाग्य मन्त्र
ॐ ह्रीं उमायै नमः
पूरी रात जागकर भजन गाते, पुराणों से शिव-पार्वती की कथाएँ पढ़ते या ध्यान करते हुए बिताएँ। स्त्रियाँ प्रायः मिलकर गीत और नृत्य से उत्सव मनाती हैं। यह जागरण हरतालिका तीज का अनिवार्य अंग है।
कपूर और घी के दीपक से शिव-पार्वती की सायं आरती करें। मूर्तियों की तीन बार प्रदक्षिणा करें। मूर्तियों के सामने साष्टाँग प्रणाम करें और सौभाग्य की कामना करें।
अगली सुबह सूर्योदय के बाद मिट्टी की मूर्तियों को बहते पानी (नदी या नाले) में विसर्जित करें। सम्भव न हो तो बाल्टी में विसर्जन कर वह पानी वृक्ष के मूल में डालें।
विसर्जन और अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्जला व्रत जल से तोड़ें, फिर फल, फिर हल्का सात्विक भोजन लें। बड़ों से आशीर्वाद लें। व्रत रखने वाली अन्य महिलाओं के साथ प्रसाद बाँटें।
पार्वती सौभाग्य मन्त्र
ॐ ह्रीं उमायै नमः
oṃ hrīṃ umāyai namaḥ
ॐ, कृपा और वैवाहिक सौभाग्य की मूर्ति देवी उमा (पार्वती) को नमस्कार।
108x जप संख्याशिव-पार्वती मन्त्र
ॐ नमः शिवायै च नमः शिवाय
oṃ namaḥ śivāyai ca namaḥ śivāya
ॐ, देवी शिवा (पार्वती) और भगवान शिव — दिव्य दम्पती — को नमस्कार।
108x जप संख्यामौसमी फल, दूध की मिठाई, पान, नारियल और खीर अर्पित करें। निर्जला व्रत होने से नैवेद्य देवता को अर्पित होता है — व्रती पारण तक कुछ नहीं खाती।
हरतालिका तीज व्रत विवाहित स्त्रियों का सबसे पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह सौभाग्य (शाश्वत वैवाहिक शुभता), पति की दीर्घायु, और प्रत्येक जन्म में उसी पति के साथ पुनर्मिलन प्रदान करता है — जैसे पार्वती ने तपस्या से शिव प्राप्त किए। अविवाहित स्त्रियों को योग्य पति प्राप्त होता है।
अगली सुबह सूर्योदय के बाद मिट्टी की मूर्तियों को बहते पानी (नदी या नाले) में विसर्जित करें। बहता पानी उपलब्ध न हो तो जल पात्र में विसर्जित कर वह जल पवित्र वृक्ष की जड़ में डालें।