चन्द्र in the अष्टम भाव
बृहत् पाराशर होराशास्त्र व्याख्या
Longevity & Occult
शास्त्रीय श्लोक
अष्टम भाव में चन्द्रमा जातक को रोगी, अल्पायु और मानसिक विकारों के प्रति प्रवृत्त बनाता है। पूर्ण और शुभ दृष्टि होने पर दीर्घायु बढ़ती है और पारलौकिक क्षमताएं विकसित होती हैं।
शास्त्रीय स्रोत देखें: BPHS Ch.24, Shloka 39-40
आधुनिक व्याख्या
गहरी भावनात्मक तीव्रता और जीवन के गूढ़ पक्ष में रुचि। सहज और पारलौकिक धारणाएं प्रबल हैं। माता या पत्नी से उत्तराधिकार संभव है। भावनात्मक उथल-पुथल समय के साथ ज्ञान में रूपांतरित होती है।
कुंजी शब्द
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