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सूर्य अर्घ्य ठीक संक्रान्ति काल में — जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है — देना चाहिए। पुण्यकाल संक्रान्ति क्षण के बाद 16 घटी (लगभग 6.5 घण्टे) तक रहता है। आदर्श रूप से, प्रातः उदित सूर्य को अर्घ्य दें।
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सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करें। सम्भव हो तो नदी में, विशेषकर गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान के जल में तिल और गंगाजल की कुछ बूँदें डालें। इससे पाप नष्ट होते हैं और शरीर शुद्ध होता है।
उदित सूर्य की ओर मुख करें। ताम्बे/पीतल के पात्र में जल भरकर लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और तिल डालें। दोनों हाथों से पात्र उठाकर सूर्य गायत्री मन्त्र पढ़ते हुए धीरे-धीरे सूर्य की दिशा में जलधारा प्रवाहित करें। जलधारा से सूर्य किरणों का इन्द्रधनुषी प्रभाव दिखना चाहिए।
ॐ भास्कराय विद्महे महाद्युतिकराय धीमहि तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्
oṃ bhāskarāya vidmahe mahādyutikarāya dhīmahi tanno ādityaḥ pracodayāt
हम तेजस्वी सूर्य (भास्कर) का ध्यान करते हैं। महान प्रकाश वाले का चिन्तन करते हैं। वह आदित्य (सूर्य) हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
पूर्वमुखी छोटी वेदी स्थापित करें। सूर्य का चित्र रखें या कुमकुम से सूर्य का चिह्न बनाएँ। घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ। लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और फल अर्पित करें। सूर्य बीज मन्त्र 108 बार जपें।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
oṃ hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ
सूर्य देव को उनके बीज ध्वनियों — ह्रां, ह्रीं, ह्रौं — सौर ऊर्जा के कम्पन सार — के माध्यम से नमन
तिल-गुड़ के लड्डू बनाएँ। परिवार, पड़ोसियों और मित्रों में "तिल गुड़ घ्या, गोड गोड बोला" (तिल-गुड़ लो, मीठा बोलो) कहते हुए वितरित करें। यह सद्भावना और मधुर सम्बन्धों का प्रतीक है।
खिचड़ी (चावल और उड़द दाल, घी और मसालों सहित) पकाएँ। पहले जलते दीपक सहित सूर्य देवता को नैवेद्य के रूप में अर्पित करें। फिर परिवार को खिचड़ी परोसें। कई क्षेत्रों में नई फसल के अनाज से बनी खिचड़ी अत्यन्त शुभ मानी जाती है।
आदित्य हृदयम् का पाठ करें — रावण के विरुद्ध युद्ध से पूर्व ऋषि अगस्त्य द्वारा भगवान राम को सिखाया गया पवित्र स्तोत्र। यह सबसे शक्तिशाली सूर्य स्तोत्र है जो विजय, स्वास्थ्य और समस्त शत्रुओं का नाश प्रदान करता है।
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्। रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥
tato yuddhaparśrāntaṃ samare cintayā sthitam | rāvaṇaṃ cāgrato dṛṣṭvā yuddhāya samupasthitam ||
तब, युद्ध से थके और चिन्तित राम को देखकर, और रावण को युद्ध के लिए सामने खड़ा देखकर, ऋषि अगस्त्य ने आकर कहा।
जरूरतमन्दों और ब्राह्मणों को तिल, गुड़, गर्म कपड़े (कम्बल, शॉल) और भोजन दान करें। मकर संक्रान्ति पर तिल दान सौ अन्य दानों के बराबर माना जाता है। खिचड़ी और फल भी दान करें।
घी के दीपक और कपूर से भगवान सूर्य की आरती करें। सूर्य की ओर मुख करके सूर्य आरती गाएँ। आरती के दौरान घण्टी बजाएँ। अन्त में लाल फूल अर्पित करें।
गुजरात, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों में पतंग उड़ाना मकर संक्रान्ति का अभिन्न अंग है। दोपहर की धूप में पतंग उड़ाएँ — ऋतु-परिवर्तन में सूर्य प्रकाश शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है, शीतकालीन पराबैंगनी किरणें त्वचा रोगों में सहायक होती हैं।
सायंकाल दीपक जलाकर सूर्य देवता को अन्तिम प्रार्थना करें। सूर्य की उत्तरायण यात्रा के लिए कृतज्ञता व्यक्त करें जो लम्बे दिन, गर्मी और फसल का मौसम लाती है। आगामी कृषि चक्र के लिए आशीर्वाद माँगें।