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हनुमान जयन्ती पूजा सूर्योदय के समय की जाती है, क्योंकि हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय के समय हुआ था। आदर्श समय सूर्योदय के एक घण्टे के भीतर है।
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सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (लाल/केसरिया श्रेष्ठ) पहनें। पूजा स्थल साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। हनुमान मूर्ति/चित्र दक्षिणमुखी स्थापित करें।
शुद्धि के लिए तीन बार जल का आचमन करें। दाहिने हाथ में जल और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प बोलें और जल छोड़ें।
विघ्नरहित पूजा के लिए गणेश जी की संक्षिप्त वन्दना से शुरू करें। अक्षत और एक फूल अर्पित करें।
हनुमान मूर्ति पर भरपूर सिन्दूर लगाएँ — यह हनुमान पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। फिर चमेली के तेल से अभिषेक करें। सिन्दूर सीता माता के प्रति हनुमान जी की भक्ति का प्रतीक है।
हनुमान जी को जनेऊ (यज्ञोपवीत) अर्पित करें। मूर्ति को लाल कपड़े से सजाएँ या लाल फूल अर्पित करें।
लाल फूल (गुड़हल, लाल गुलाब) और पान के पत्ते अर्पित करें। हनुमान जी के नामों या 108 नामों से अर्चना करें।
अगरबत्ती जलाकर मूर्ति के सामने घुमाएँ। घी का दीपक जलाएँ और दीप दर्शन करें।
माला से हनुमान बीज मन्त्र 108 बार जपें। साहस और भक्ति पर ध्यान केन्द्रित करें।
ॐ हं हनुमते नमः
oṃ haṃ hanumate namaḥ
बल और भक्ति के साक्षात् स्वरूप भगवान हनुमान को नमन
सम्पूर्ण हनुमान चालीसा (40 चौपाइयाँ) का पाठ करें। यह हनुमान जयन्ती पूजा का केन्द्रबिन्दु है। पूर्ण भक्ति से पाठ करें।
बूँदी के लड्डू, केले और नारियल नैवेद्य के रूप में अर्पित करें। भोग के चारों ओर जल छिड़कें।
"आरती कीजे हनुमान लला की" गाते हुए कपूर और घी के दीपक से आरती करें। घण्टी बजाएँ।
पूजा स्थल की 3 बार प्रदक्षिणा करें। मूर्ति के सामने साष्टाङ्ग प्रणाम करें और बल, साहस व भक्ति की प्रार्थना करें। भक्तों को सिन्दूर प्रसाद बाँटें।