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हनुमान जी
हनुमान वायु देव और अंजना के पुत्र हैं। बचपन में उन्होंने सूर्य को पका फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इन्द्र ने वज्र से प्रहार किया पर वायु ने उन्हें पुनर्जीवित किया और सभी देवताओं ने उन्हें वरदान दिए।
भक्ति, शक्ति और निःस्वार्थ सेवा के मूर्तिमान रूप का उत्सव। हनुमान आदर्श भक्त हैं — शक्तिशाली किन्तु विनम्र।
हनुमान मन्दिर जाएँ, हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। सिन्दूर, तेल और फूल अर्पित करें।
हनुमान जयन्ती पूजा सूर्योदय के समय की जाती है, क्योंकि हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय के समय हुआ था। आदर्श समय सूर्योदय के एक घण्टे के भीतर है।
इस शुभ चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयन्ती) पर, बल, साहस, भक्ति और सभी विपत्तियों से रक्षा के लिए, मैं भगवान हनुमान की पूजा करता/करती हूँ।
सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (लाल/केसरिया श्रेष्ठ) पहनें। पूजा स्थल साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। हनुमान मूर्ति/चित्र दक्षिणमुखी स्थापित करें।
शुद्धि के लिए तीन बार जल का आचमन करें। दाहिने हाथ में जल और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प बोलें और जल छोड़ें।
विघ्नरहित पूजा के लिए गणेश जी की संक्षिप्त वन्दना से शुरू करें। अक्षत और एक फूल अर्पित करें।
हनुमान मूर्ति पर भरपूर सिन्दूर लगाएँ — यह हनुमान पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। फिर चमेली के तेल से अभिषेक करें। सिन्दूर सीता माता के प्रति हनुमान जी की भक्ति का प्रतीक है।
हनुमान जी को जनेऊ (यज्ञोपवीत) अर्पित करें। मूर्ति को लाल कपड़े से सजाएँ या लाल फूल अर्पित करें।
लाल फूल (गुड़हल, लाल गुलाब) और पान के पत्ते अर्पित करें। हनुमान जी के नामों या 108 नामों से अर्चना करें।
अगरबत्ती जलाकर मूर्ति के सामने घुमाएँ। घी का दीपक जलाएँ और दीप दर्शन करें।
माला से हनुमान बीज मन्त्र 108 बार जपें। साहस और भक्ति पर ध्यान केन्द्रित करें।
हनुमान बीज मन्त्र
ॐ हं हनुमते नमः
सम्पूर्ण हनुमान चालीसा (40 चौपाइयाँ) का पाठ करें। यह हनुमान जयन्ती पूजा का केन्द्रबिन्दु है। पूर्ण भक्ति से पाठ करें।
बूँदी के लड्डू, केले और नारियल नैवेद्य के रूप में अर्पित करें। भोग के चारों ओर जल छिड़कें।
"आरती कीजे हनुमान लला की" गाते हुए कपूर और घी के दीपक से आरती करें। घण्टी बजाएँ।
पूजा स्थल की 3 बार प्रदक्षिणा करें। मूर्ति के सामने साष्टाङ्ग प्रणाम करें और बल, साहस व भक्ति की प्रार्थना करें। भक्तों को सिन्दूर प्रसाद बाँटें।
हनुमान बीज मन्त्र
ॐ हं हनुमते नमः
oṃ haṃ hanumate namaḥ
बल और भक्ति के साक्षात् स्वरूप भगवान हनुमान को नमन
108x जप संख्याहनुमान गायत्री
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
oṃ āñjaneyāya vidmahe vāyuputrāya dhīmahi | tanno hanumat pracodayāt ||
हम अंजना के पुत्र का ध्यान करते हैं, वायुपुत्र का चिन्तन करते हैं। हनुमान हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
हनुमान ध्यान श्लोक
मनोजवं मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
manojavaṃ mārutatulyavegam jitendriyaṃ buddhimatāṃ variṣṭham | vātātmajaṃ vānarayūthamukhyaṃ śrīrāmadūtaṃ śaraṇaṃ prapadye ||
मैं श्रीराम के दूत की शरण लेता हूँ — जो मन की तरह तेज, पवन के समान वेगवान, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायुपुत्र और वानरों के मुखिया हैं।
हनुमान चालीसा
तुलसीदास रचित हनुमान जी का सबसे लोकप्रिय स्तोत्र। 40 चौपाइयों में हनुमान जी की महिमा और उनकी रक्षा की प्रार्थना।
बजरंग बाण
हनुमान जी का शक्तिशाली रक्षात्मक स्तोत्र। बुरी शक्तियों और काले जादू से रक्षा के लिए पढ़ें।
आरती कीजे हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग दोष जाके निकट न झाँके॥ आरती कीजे हनुमान लला की॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥ दे बीरा रघुनाथ पठाये। लंका जारि सिया सुधि लाये॥ आरती कीजे हनुमान लला की॥ लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ लंका जारि असुर सब मारे। सियारामजी के काज सँवारे॥ आरती कीजे हनुमान लला की॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि सजीवन प्राण उबारे॥ पैठि पताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥ आरती कीजे हनुमान लला की॥ बाएँ भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा सन्तजन तारे॥ सूर समर करनी सुनि रारे। जग में यश तेरा तुम्हारे॥ आरती कीजे हनुमान लला की॥ कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥ जो हनुमानजी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥ आरती कीजे हनुमान लला की॥
āratī kīje hanumāna lalā kī | duṣṭa dalana raghunātha kalā kī || jāke bala se girivara kām̐pe | roga doṣa jāke nikaṭa na jhām̐ke || āratī kīje hanumāna lalā kī || añjani putra mahā baladāī | santana ke prabhu sadā sahāī || de bīrā raghunātha paṭhāye | laṅkā jāri siyā sudhi lāye || āratī kīje hanumāna lalā kī || laṅkā so koṭa samudra sī khāī | jāta pavanasuta bāra na lāī || laṅkā jāri asura saba māre | siyārāmajī ke kāja sam̐vāre || āratī kīje hanumāna lalā kī || lakṣmaṇa mūrchita paḍe sakāre | āṇi sajīvana prāṇa ubāre || paiṭhi pātāla tori jama kāre | ahirāvaṇa kī bhujā ukhāre || āratī kīje hanumāna lalā kī || bāem̐ bhujā asura dala māre | dāhine bhujā santajana tāre || sūra samara karanī suni rāre | jaga meṃ yaśa terā tumhāre || āratī kīje hanumāna lalā kī || kañcana thāra kapūra lau chāī | āratī karata añjanā māī || jo hanumānajī kī āratī gāve | basi baikuṇṭha parama pada pāve || āratī kīje hanumāna lalā kī ||
बूँदी के लड्डू, केले, गुड़, तिल की मिठाई और नारियल
अपार शारीरिक और मानसिक बल, बाधाओं पर विजय पाने का साहस, बुरी शक्तियों से रक्षा, सभी कार्यों में सफलता, और श्रीराम के प्रति भक्ति का गहन होना