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सोमवार व्रत पूजा प्रदोष काल (सन्ध्या समय) में करना सर्वोत्तम है। सूर्यास्त से लगभग ढाई घण्टे बाद तक का समय इस दिन शिव पूजा के लिए सबसे शुभ है।
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पूजा से पहले सायं स्नान करें। स्वच्छ सफ़ेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। दिन भर सात्विक और भक्तिपूर्ण मनःस्थिति बनाए रखें।
शिवलिंग या मूर्ति के सामने बैठें। दाहिने हाथ में जल लेकर सोमवार व्रत का विधिवत् संकल्प लें। अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य बोलें।
"ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हुए शिवलिंग पर धीरे-धीरे दूध चढ़ाएँ। उसके बाद स्वच्छ जल अर्पित करें। धारा निरन्तर और मन्द होनी चाहिए।
ॐ नमः शिवाय
oṃ namaḥ śivāya
ॐ, शिव को नमन। पाँच पवित्र अक्षर पंचतत्व और उन पर शिव के सर्वोच्च अधिपत्य का प्रतीक हैं।
शिवलिंग पर बिल्व पत्र (चिकनी सतह ऊपर) और सफ़ेद फूल चढ़ाएँ। धूप/अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएँ। यदि सम्भव हो तो लिंग की तीन बार परिक्रमा करें।
रुद्राक्ष माला या उँगलियों पर गिनते हुए "ॐ नमः शिवाय" 108 बार जपें। आँखें बन्द कर शान्त बैठें, हृदय में शिव पर ध्यान केन्द्रित करें।
ॐ नमः शिवाय
oṃ namaḥ śivāya
ॐ, शिव को नमन। पाँच पवित्र अक्षर पंचतत्व और उन पर शिव के सर्वोच्च अधिपत्य का प्रतीक हैं।
शिवलिंग के सामने घी के दीपक से दक्षिणावर्त आरती करें। फल नैवेद्य के रूप में अर्पित करें। साष्टांग नमस्कार करके शिव की कृपा के लिए प्रार्थना करें।