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मध्याह्न काल (दोपहर का समय) राम नवमी पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ है — भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को मध्याह्न में हुआ था
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प्रातः उठकर गंगा जल (उपलब्ध हो तो) से पवित्र स्नान करें। स्वच्छ पीले या केसरिया वस्त्र पहनें। मध्याह्न (दोपहर) पूजा तक व्रत रखें।
ताम्र या पीतल के कलश में जल भरें, ऊपर 5 आम के पत्ते और एक साबुत नारियल रखें। कलश पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाएँ। यह सभी पवित्र नदियों का आवाहन है।
राम मूर्ति या चित्र (आदर्शतः सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित) को पूर्व दिशा की ओर स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें। नीचे पीला वस्त्र बिछाएँ। बाल राम संस्कार के लिए पास में पालना रखें।
16 उपचारों की पूजा करें: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, प्रदक्षिणा और मन्त्र पुष्पाञ्जलि — प्रत्येक भक्तिपूर्वक भगवान राम को अर्पित करें।
ॐ श्री रामाय नमः
oṃ śrī rāmāya namaḥ
भगवान राम को नमन, जो मुक्तिदाता हैं (तारक — भवसागर से पार कराने वाले)
राम मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से क्रमशः स्नान कराएँ, फिर गंगा जल या शुद्ध जल से। धीरे से पोंछकर वापस वेदी पर रखें।
मूर्ति को पीला वस्त्र (पीताम्बर) पहनाएँ। चन्दन और कुमकुम का तिलक लगाएँ। तुलसी की माला और लाल-पीले फूल अर्पित करें।
कई परम्पराओं में राम-सीता विवाह (सीता कल्याणम्) का आनुष्ठानिक मंचन किया जाता है — राम और सीता मूर्तियों में माला विनिमय, रामायण में वर्णित उनके दिव्य मिलन का प्रतीक।
मध्याह्न (ठीक दोपहर — राम के जन्म का क्षण) पर, सजे हुए पालने में छोटी बालराम मूर्ति रखें। भक्ति गीत गाते हुए पालने को धीरे-धीरे झुलाएँ। जन्मोत्सव मनाने के लिए शंख बजाएँ और घण्टी बजाएँ।
रामायण के चुनिन्दा अध्यायों का पाठ करें — विशेषकर तुलसीदास के रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण से बालकाण्ड (जन्म अध्याय)। कई भक्त हनुमान जी के आशीर्वाद हेतु सुन्दरकाण्ड का पाठ करते हैं।
अगरबत्ती जलाकर मूर्ति के सामने घुमाएँ। फिर घी का दीपक जलाकर आरती करें — 3 बार चरणों पर, 2 बार नाभि पर, 1 बार मुख पर, 7 बार पूरी मूर्ति के चारों ओर।
कपूर के दीपक के साथ "आरती श्री रामचन्द्र जी की" गाते हुए भगवान राम की आरती करें। आरती के दौरान लगातार घण्टी बजाएँ।
भगवान राम को फल, खीर, पंजीरी, नारियल और सात्विक भोजन अर्पित करें। भोग के चारों ओर जल छिड़कें और नैवेद्य मन्त्र पढ़ें।
"श्रीराम जय राम जय जय राम" का जप करते हुए मूर्ति की 3 बार प्रदक्षिणा करें। धर्म, रक्षा और सभी प्राणियों के कल्याण हेतु अन्तिम प्रार्थना करें।
श्रीराम जय राम जय जय राम
śrīrāma jaya rāma jaya jaya rāma
श्रीराम की जय, राम की जय, जय जय राम!