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प्रथम दिन घटस्थापना अभिजित मुहूर्त (लगभग मध्याह्न, प्रातः 11:45 से 12:30 बजे) में करनी चाहिए। यदि अभिजित उपलब्ध न हो तो प्रतिपदा तिथि के प्रथम तृतीयांश में करें। घटस्थापना में चित्रा नक्षत्र वर्जित है।
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पूजा स्थल को साफ कर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। ताम्बे/पीतल के कलश में जल भरें, किनारे पर आम के पत्ते रखें, और ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें। मिट्टी और जौ के बीजों की क्यारी पर कलश स्थापित करें। अखण्ड ज्योति प्रज्वलित करें। प्रथम दिन माँ शैलपुत्री — पर्वतराज की पुत्री — को समर्पित है।
माँ ब्रह्मचारिणी — पार्वती के तपस्विनी रूप — की पूजा करें। शक्कर, फल और सफेद फूल अर्पित करें। दुर्गा बीज मन्त्र 108 बार जपें। घी/तेल डालकर अखण्ड ज्योति बनाए रखें।
ॐ दुं दुर्गायै नमः
oṃ duṃ durgāyai namaḥ
अजेय देवी दुर्गा को नमन, जो सभी कष्टों का निवारण करती हैं
माँ चन्द्रघण्टा — माथे पर अर्धचन्द्र घण्टी धारिणी, दुष्टों का नाश करने वाली — की पूजा करें। दूध से बनी मिठाई और पीले फूल अर्पित करें। कृपा प्राप्ति हेतु पूजा में घण्टी बजाएँ।
माँ कूष्माण्डा — अपनी मुस्कान से ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली — की पूजा करें। मालपुआ और पेठा अर्पित करें। वे सूर्य के समान तेजस्वी हैं और ब्रह्माण्डीय ऊर्जा प्रदान करती हैं।
माँ स्कन्दमाता — कार्तिकेय (स्कन्द) की माता — की पूजा करें। केला और अन्य फल अर्पित करें। वे ज्ञान और मोक्ष प्रदान करती हैं। पूजा के बाद ध्यान में बैठें।
माँ कात्यायनी — ऋषि कात्यायन के आश्रम में जन्मी, महिषासुर का वध करने वाली योद्धा रूप — की पूजा करें। शहद अर्पित करें और नवार्ण मन्त्र पढ़ें। अविवाहित कन्याएँ अच्छे वर के लिए इनकी पूजा करती हैं।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
oṃ aiṃ hrīṃ klīṃ cāmuṇḍāyai vicce
ॐ — आदि ध्वनि; ऐं — सरस्वती बीज; ह्रीं — लक्ष्मी बीज; क्लीं — काली बीज; चामुण्डा — चण्ड-मुण्ड संहारिणी — को नमन
माँ कालरात्रि — सबसे भयंकर रूप, रात्रि के समान श्यामवर्णा, अज्ञान और दुष्ट आत्माओं का नाश करने वाली — की पूजा करें। गुड़ अर्पित करें। इसी दिन सरस्वती स्थापना भी करें — पुस्तकें और वाद्ययन्त्र वेदी के सामने रखें।
माँ महागौरी — श्वेत तेजस्विनी, सबसे पवित्र रूप, सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली — की पूजा करें। दुर्गा गायत्री मन्त्र के साथ घी और सामग्री से अष्टमी हवन करें। फिर कन्या पूजन करें — 9 कन्याओं (नौ देवी स्वरूप) को आमन्त्रित कर उनके पैर धोएँ, तिलक लगाएँ, उपहार, भोजन और मिठाई दें, और उनका आशीर्वाद लें।
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्यकुमारि धीमहि तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्
oṃ kātyāyanāya vidmahe kanyakumāri dhīmahi tanno durgiḥ pracodayāt
हम कात्यायनी का ध्यान करते हैं। वह कन्या देवी हमारी बुद्धि को प्रकाशित करें। दुर्गा हमें प्रेरित और मार्गदर्शित करें।
माँ सिद्धिदात्री — सभी 8 सिद्धियों (अलौकिक शक्तियों) की दाता — की पूजा करें। 108 आहुतियों के साथ अन्तिम नवमी हवन करें। विशेष भोग और मिठाई अर्पित करें। कलश में उगे जौ के अंकुर देखें — लम्बे हरे अंकुर सम्पन्न वर्ष का संकेत हैं।
प्रतिदिन प्रातः: सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें, ताजी अगरबत्ती जलाएँ, दुर्गा मूर्ति पर लाल फूल और कुमकुम अर्पित करें, अखण्ड ज्योति में घी डालें, जौ के अंकुरों पर जल छिड़कें, दुर्गा बीज मन्त्र 108 बार जपें, और आरती करें। सायं पुनः आरती और नैवेद्य अर्पित करें।
ॐ दुं दुर्गायै नमः
oṃ duṃ durgāyai namaḥ
अजेय देवी दुर्गा को नमन, जो सभी कष्टों का निवारण करती हैं
विजयादशमी पर, अन्तिम आरती करें और 9 दिनों में किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा माँगें। कलश से नारियल निकालें। अखण्ड ज्योति बुझाएँ। जौ के अंकुर प्रसाद के रूप में वितरित करें। दुर्गा मूर्ति का जल में विसर्जन करें (यदि मिट्टी की हो) अथवा श्रद्धापूर्वक रखें।