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मासिक शिवरात्रि प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (14वीं तिथि) को पड़ती है। निशीथ काल (मध्यरात्रि) शिव पूजा का सर्वोत्तम समय है। यदि जागना सम्भव न हो तो प्रदोष काल (सन्ध्या) अगला उत्तम समय है।
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स्नान के बाद शिवलिंग या मूर्ति के सामने बैठें। दाहिने हाथ में जल लेकर मासिक शिवरात्रि व्रत और पूजन का संकल्प लें।
घण्टी बजाकर और मन्त्रोच्चार करके शिवलिंग या मूर्ति में शिव का आवाहन करें। लिंग पर विभूति/भस्म लगाएँ। आधार पर फूल अर्पित करें।
"ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हुए शिवलिंग पर धीरे-धीरे दूध चढ़ाएँ। उसके बाद जल (गंगाजल यदि उपलब्ध हो) अर्पित करें। दूध लिंग पर निरन्तर प्रवाहित होना चाहिए।
ॐ नमः शिवाय
oṃ namaḥ śivāya
ॐ, शिव को नमन। पाँच अक्षर (न-मः-शि-वा-य) पंचतत्व और शिव के पाँच मुखों का प्रतीक हैं।
तीन पत्तियों वाले बिल्व पत्र शिवलिंग पर चिकनी सतह ऊपर करके चढ़ाएँ। प्रत्येक पत्ता शिव के तीन नेत्रों, तीन गुणों या त्रिमूर्ति का प्रतीक है। साथ में सफ़ेद फूल और धतूरा भी अर्पित करें।
रुद्राक्ष माला से "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जप करें। आँखें बन्द कर शिव पर ध्यान केन्द्रित करें। यह शिवरात्रि की मुख्य मन्त्र साधना है।
ॐ नमः शिवाय
oṃ namaḥ śivāya
ॐ, शिव को नमन। पाँच अक्षर (न-मः-शि-वा-य) पंचतत्व और शिव के पाँच मुखों का प्रतीक हैं।
शिवलिंग के सामने घी या कपूर के दीपक से दक्षिणावर्त आरती करें। पूरे समय घण्टी बजाते रहें। अन्तिम साष्टांग नमस्कार करें और शिव कृपा की प्रार्थना करें।