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मंगलवार व्रत पूजा प्रदोष काल (सन्ध्या समय) में करना सर्वोत्तम है। मंगलवार सायं हनुमान मन्दिर विशेष रूप से जीवन्त होते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः पूजा भी स्वीकार्य है।
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पूजा से पहले स्नान करें। यदि सम्भव हो तो स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र पहनें, ये हनुमान के रंग हैं। इस दिन ब्रह्मचर्य पालन करें और तामसिक भोजन से बचें।
हनुमान मूर्ति या चित्र के सामने बैठें। दाहिने हाथ में जल लें। अपना नाम, गोत्र और व्रत का उद्देश्य बोलें — साहस, रक्षा, या मंगल दोष निवारण।
सिन्दूर को चमेली के तेल में मिलाकर हनुमान मूर्ति पर भरपूर लगाएँ। यह हनुमान को सबसे विशिष्ट अर्पण है — उन्होंने सीता के प्रति भक्ति से अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर लगाया था। जनेऊ/मौली अर्पित करें।
भक्तिपूर्वक हनुमान चालीसा (तुलसीदास कृत 40 चौपाइयाँ) का पाठ करें। यह हनुमान की सबसे लोकप्रिय और शक्तिशाली प्रार्थना है। यदि समय हो तो 2, 3 या 7 बार पाठ करें।
माला से हनुमान बीज मन्त्र का 108 बार जप करें। यह संकेन्द्रित मन्त्र हनुमान की रक्षात्मक ऊर्जा का आवाहन करता है और भय एवं बाधाओं को दूर करने में विशेष प्रभावशाली है।
ॐ ऐं भ्रीं हनुमन्ताय नमः
oṃ aiṃ bhrīṃ hanumantāya namaḥ
ॐ, ज्ञान (ऐं) और शक्ति (भ्रीं) के बीजाक्षरों सहित हनुमान को नमन। यह मन्त्र हनुमान की पूर्ण दिव्य शक्ति का आवाहन करता है।
घी के दीपक से आरती करें। केले और बेसन के लड्डू नैवेद्य के रूप में अर्पित करें — ये हनुमान का प्रिय भोजन है। प्रसाद वितरित करें। दण्डवत प्रणाम से समापन करें।