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उत्सव प्रातःकाल (अमृत वेला, लगभग 4-5 बजे) प्रभात फेरी (सुबह की शोभायात्रा) से आरम्भ होता है। अखण्ड पाठ (गुरु ग्रन्थ साहिब का 48 घण्टे का निरन्तर पाठ) इस दिन समाप्त होता है। गुरुद्वारों में मुख्य उत्सव दिन भर जारी रहता है।
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अमृत वेला (प्रभात से पहले, लगभग 4 बजे) में उठें। प्रभात फेरी में शामिल हों — गुरु ग्रन्थ साहिब के शब्दों (भक्ति गीतों) का गायन करते हुए मोहल्ले में सामुदायिक शोभायात्रा। निशान साहिब (सिख ध्वज) शोभायात्रा का नेतृत्व करता है।
गुरु नानक देव जी द्वारा रचित प्रातःकालीन प्रार्थना, सम्पूर्ण जपजी साहिब का पाठ करें। यह गुरु ग्रन्थ साहिब की आरम्भिक रचना है और मूल आध्यात्मिक शिक्षाओं का सार है। मूल मन्तर पर ध्यान केन्द्रित करके पाठ करें।
गुरुद्वारा दर्शन के लिए जाएँ। विशेष कीर्तन (भक्ति संगीत) कार्यक्रमों में भाग लें। गुरु नानक के जीवन, यात्राओं (उदासियों) और शिक्षाओं के बारे में कथा (प्रवचन) सुनें। गुरु ग्रन्थ साहिब के आगे श्रद्धापूर्वक शीश नवाएँ।
अखण्ड पाठ का भोग (समापन समारोह) में सम्मिलित हों — दो दिन पहले आरम्भ हुए सम्पूर्ण गुरु ग्रन्थ साहिब का 48 घण्टे का निरन्तर पाठ। यह अरदास (सामूहिक प्रार्थना) और हुकमनामा (ग्रन्थ के यदृच्छिक उद्घाटन से दैवी आदेश) के साथ पूर्ण होता है।
गुरुद्वारे या समुदाय में सेवा (निःस्वार्थ सेवा) करें। जाति, धर्म या स्थिति की भेदभाव के बिना सभी को लंगर (सामुदायिक भोजन) बनाने और परोसने में सहायता करें। यह गुरु नानक की समानता की शिक्षा का सम्मान करने वाला केन्द्रीय अभ्यास है।
सायंकाल को उत्सव में घर और गुरुद्वारे पर दीपक और मोमबत्तियाँ जलाएँ। गुरुद्वारे और घर रोशनी से सजाए जाते हैं (दीवाली के समान)। रहरास साहिब (सायं प्रार्थना) में उपस्थित हों। सभी अतिथियों और पड़ोसियों के साथ मिठाई, विशेषकर कड़ाह प्रसाद बाँटें।