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सूर्य शान्ति पूजा रविवार को प्रातःकाल, सूर्योदय के पहले घण्टे में करनी चाहिए। मध्याह्न काल भी शुभ है।
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सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करके स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र पहनें। पूजा के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
दाहिने हाथ में रक्तचन्दन व पुष्प मिश्रित जल लें। अपना नाम, गोत्र और सूर्य ग्रह दोष निवारण हेतु पूजा का संकल्प करें।
ताँबे के पात्र में जल भरें, रक्तचन्दन और लाल फूल डालें। गेहूँ के बिछौने पर रखें। यह सूर्य की ऊर्जा का प्रतीक है।
लाल फूल अर्पित कर और घी का दीपक जलाकर सूर्य देव का आवाहन करें। "ॐ सूर्याय नमः" का उच्चारण करें।
सूर्य बीज मन्त्र 7,000 बार (या न्यूनतम 108 बार) जपें। रुद्राक्ष या स्फटिक माला का उपयोग करें। पूर्व की ओर मुख कर सुनहरे-लाल तेजोमय गोले का ध्यान करें।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
oṃ hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ
सूर्य देव को नमन। बीज अक्षर सूर्य की दीप्तिमान ऊर्जा का आवाहन ओज, अधिकार और आध्यात्मिक प्रकाश हेतु करते हैं।
उगते सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों। सूर्य गायत्री का जाप करते हुए ताँबे के पात्र से निरन्तर धारा में जल अर्पित करें। तीन अर्घ्य दें।
ॐ भास्कराय विद्महे महाद्युतिकराय धीमहि । तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥
oṃ bhāskarāya vidmahe mahādyutikarāya dhīmahi | tanno sūryaḥ pracodayāt ||
हम दीप्तिमान सूर्य (भास्कर) का ध्यान करते हैं, जो महान तेज के स्रोत हैं। सूर्य हमारी बुद्धि को प्रकाशित करें और सन्मार्ग दिखाएँ।
गेहूँ और गुड़ गरीबों या ब्राह्मण को दान करें। ताँबे की वस्तुएँ भी दी जा सकती हैं। रविवार के दान से सूर्य के अशुभ प्रभाव शान्त होते हैं।
सूर्य देव से ग्रह दोष निवारण की हार्दिक प्रार्थना करें। साष्टांग नमस्कार करें। परिवार को प्रसाद वितरित करें।