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केतु शान्ति पूजा मंगलवार रात्रि सूर्यास्त के बाद या राहु काल में करनी चाहिए। मंगलवार रात्रि और अमावस्या केतु उपचार के लिए सर्वाधिक प्रभावी हैं।
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सायं स्नान करें। शुद्धि के लिए स्नान के जल में कुशा घास डालें। स्वच्छ धूसर, भूरे या मन्द रंग के वस्त्र पहनें। केतु वैराग्य और सादगी को पसन्द करता है।
दक्षिण दिशा की ओर मुख कर बैठें। दाहिने हाथ में कुशा सहित जल लेकर आध्यात्मिक विकास और कर्म निवारण हेतु केतु शान्ति का संकल्प करें।
जल से भरे पात्र को सात अनाजों के बिछौने पर रखें। कुशा और तिल डालें। पात्र के गले में कुशा लपेटें। धूसर वस्त्र से ढकें।
घी का दीपक जलाकर कुशा और मिश्रित रंगों के फूल अर्पित कर केतु का आवाहन करें। "ॐ केतवे नमः" तीन बार बोलें।
केतु बीज मन्त्र 17,000 बार (या न्यूनतम 108 बार) जपें। लहसुनिया (वैदूर्य) या रुद्राक्ष माला का उपयोग करें। धूम्रवर्ण ज्वाला-पुच्छ के प्रकाश में विलीन होने का ध्यान करें।
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
oṃ srāṃ srīṃ srauṃ saḥ ketave namaḥ
केतु (छाया पुच्छ) को नमन। बीज अक्षर केतु की मुक्तिदायिनी ऊर्जा का आवाहन मोक्ष, पूर्वजन्म कर्म मुक्ति और आध्यात्मिक अन्तर्दृष्टि हेतु करते हैं।
यदि सम्भव हो तो कुशा और घी से लघु होम करें। केतु गायत्री जपते हुए सात अनाज और तिल की आहुति दें। केतु अग्नि से शुद्ध होता है।
ज़रूरतमन्दों को कम्बल और सात अनाज दान करें। कुत्तों (केतु का सम्बद्ध पशु) को भोजन दें। आध्यात्मिक संस्थाओं, मठों या संन्यासियों की सहायता करें।
आध्यात्मिक मुक्ति, विघ्न निवारण और पूर्वजन्म कर्म निवारण हेतु केतु और भगवान गणेश (केतु के अधिष्ठाता देवता) से प्रार्थना करें। नमस्कार करें।