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दशहरा पूजा विजय मुहूर्त में की जाती है, जो आश्विन शुक्ल दशमी के अपराह्न काल में आता है। सबसे शुभ समय सामान्यतः दोपहर 1:30 से 3:30 बजे के बीच होता है।
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पूजा स्थल साफ करें। भगवान राम और/या देवी दुर्गा के चित्र स्थापित करें। शमी के पत्ते, अपराजिता के फूल इकट्ठा करें और शस्त्र पूजा के लिए अपनी जीविका के उपकरण/साधन सजाएँ।
शमी वृक्ष (या वेदी पर रखे शमी पत्तों) की पूजा करें। शमी पत्तों पर कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। शमी वृक्ष इसलिए पूजनीय है क्योंकि अर्जुन ने पाण्डवों के वनवास में अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे।
देवी अपराजिता (अजेय) की नीले अपराजिता फूलों, चन्दन लेप और कुमकुम से पूजा करें। अपराजिता मन्त्र का जाप करें। वे अजेयता और सफलता प्रदान करती हैं।
ॐ अपराजितायै नमः। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
oṃ aparājitāyai namaḥ | hare kṛṣṇa hare kṛṣṇa kṛṣṇa kṛṣṇa hare hare | hare rāma hare rāma rāma rāma hare hare ||
अजेय देवी अपराजिता को नमन। हरे कृष्ण, हरे राम — दिव्य विजय का आवाहन करने वाला महामन्त्र।
भगवान राम की फूलों, चन्दन, कुमकुम और अक्षत से पूजा करें। नीले फूल अर्पित करें (राम का प्रिय रंग नीला/श्याम है)। राम मन्त्र का जाप करें और रामायण (लंकाकाण्ड — राम की रावण पर विजय) का एक अंश पढ़ें।
ॐ श्री रामाय नमः
oṃ śrī rāmāya namaḥ
धर्म के साक्षात् स्वरूप भगवान श्रीराम को नमन
अपनी जीविका के साधन — वाहन, औजार, पुस्तकें, कम्प्यूटर, वाद्य यन्त्र, रसोई के बर्तन — पूजा वेदी के पास सजाएँ। प्रत्येक वस्तु पर कुमकुम और अक्षत लगाएँ। फूल और चन्दन लेप अर्पित करें। यह आपके कमाने और सृजन के साधनों को पवित्र करता है।
पूजा के बाद, अपने गाँव या मोहल्ले की सीमा ईशान (उत्तर-पूर्व) दिशा में पार करें। इसे सीमोल्लंघन कहते हैं — विजय और विस्तार का प्रतीकात्मक अनुष्ठान। अपने साथ शमी के पत्ते ले जाएँ।
पड़ोसियों और मित्रों के साथ शमी पत्रों का आदान-प्रदान करें, यह कहते हुए: "शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥" — शमी पत्ते सोने और समृद्धि के आदान-प्रदान का प्रतीक हैं।
मिठाई (जलेबी, श्रीखण्ड), फल और नारियल नैवेद्य के रूप में अर्पित करें। कपूर और घी के दीपक से आरती करें।
शाम को रावण दहन में भाग लें या आयोजित करें — रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाना। यह बुराई पर अच्छाई की जीत, राम की रावण पर विजय का प्रतीक है।