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अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को पड़ती है। पूरा दिन शुभ है — किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं। इस दिन किया गया कोई भी कार्य अक्षय (अनन्त) फल देता है। पूजा, दान और ख़रीदारी दिन में कभी भी की जा सकती है।
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प्रातः शुद्धि स्नान करें। स्वच्छ पीले या सफ़ेद वस्त्र पहनें। वेदी के सामने बैठकर अक्षय तृतीया पूजा और दान के लिए विधिवत् संकल्प करें।
पीले कपड़े से सजी वेदी पर लक्ष्मी-विष्णु की मूर्तियाँ या चित्र स्थापित करें। चन्दन, तुलसी पत्र (विष्णु को), पीले फूल, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें। अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएँ।
तुलसी माला से विष्णु बीज मन्त्र का 108 बार जप करें। भगवान विष्णु के स्वरूप पर ध्यान केन्द्रित करें और अक्षय आशीर्वाद की कामना करें।
ॐ नमो नारायणाय
oṃ namo nārāyaṇāya
ॐ, सभी प्राणियों के परम आश्रय भगवान नारायण (विष्णु) को नमस्कार।
लक्ष्मी मन्त्र का 108 बार जप करें। देवी लक्ष्मी से घर में धन, समृद्धि और प्रचुरता की प्रार्थना करें। कमल के फूल या कमल उपलब्ध न हो तो पीले फूल अर्पित करें।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
oṃ śrīṃ mahālakṣmyai namaḥ
ॐ, समृद्धि के बीज अक्षर (श्रीं) सहित, देवी महालक्ष्मी को नमस्कार।
लक्ष्मी-विष्णु को नैवेद्य (फल, मिठाई, खीर) अर्पित करें। कपूर और घी के दीपक से आरती करें। घण्टी बजाएँ और सभी परिवारजनों को ज्योति दिखाएँ।
अक्षय तृतीया मुख्यतः दान का दिन है। ज़रूरतमन्दों को वस्त्र, अनाज, जल के बर्तन (गर्मी के लिए), सोने/चाँदी के सिक्के, फल और धन दान करें। इस दिन अन्न दान और जल दान विशेष पुण्यदायी हैं।
सोना या चाँदी ख़रीदें — थोड़ी सी भी। यह परम्परा दर्शाती है कि अक्षय तृतीया पर प्राप्त धन अक्षय (कभी न घटने वाला) होता है। एक स्वर्ण मुद्रा या चाँदी का छोटा टुकड़ा भी पर्याप्त है।
राहगीरों और ग़रीबों को सत्तू (भुने चने का आटा जल और गुड़ मिलाकर), छाछ या जल वितरित करें। अक्षय तृतीया गर्मी की चरम पर पड़ती है, इसलिए जल और शीतल पेय सबसे मूल्यवान दान है।