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प्रत्येक दिन 30 मुहूर्तों में विभाजित, प्रत्येक का एक अधिष्ठाता देवता
मुहूर्त दिन (सूर्योदय से सूर्योदय) का तीसवाँ भाग है, लगभग 48 मिनट। दिन 15 दिवा और 15 रात्रि मुहूर्तों में विभाजित है। 8वाँ दिवा मुहूर्त (अभिजित्) सर्वाधिक शुभ है, जबकि 26-27वें मुहूर्त पवित्र ब्राह्म मुहूर्त हैं।
दिवा मुहूर्त = (सूर्यास्त - सूर्योदय) / 15। रात्रि मुहूर्त = (अगला सूर्योदय - सूर्यास्त) / 15। ग्रीष्म में दिवा मुहूर्त लम्बे (~55-60 मि.) और रात्रि छोटे होते हैं। शीत में विपरीत।
Daytime Muhurta = (Sunset - Sunrise) / 15
Nighttime Muhurta = (Next Sunrise - Sunset) / 15
Equinox: ~48 min each | Summer day: ~55-60 min | Winter day: ~38-42 min
अभिजित् मुहूर्त 8वाँ दिवा मुहूर्त है, जो स्थानीय मध्याह्न से लगभग 24 मिनट पहले से 24 मिनट बाद तक फैला है। यह सभी कार्यों के लिए सार्वभौमिक रूप से शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु इस काल के अधिपति हैं। "अभिजित्" का अर्थ है "विजयी"। हालाँकि, बुधवार को अभिजित् मुहूर्त का उपयोग नहीं किया जाता।
अभिजित् गणना:
Local Noon = (Sunrise + Sunset) / 2
Abhijit Start = Noon - (1 Muhurta Duration / 2)
Abhijit End = Noon + (1 Muhurta Duration / 2)
विषुव पर सामान्यतः ~11:36 से 12:24 (अक्षांश/ऋतु से भिन्न)
ब्रह्म मुहूर्त रात्रि चक्र के 26वें और 27वें मुहूर्त हैं — सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले। यह आध्यात्मिक साधना, ध्यान, मन्त्र जप और शास्त्र अध्ययन के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। वातावरण सात्विक होता है — वायु स्वच्छ है, मन निद्रा के बाद स्वाभाविक रूप से शान्त है, और प्राण ऊर्जा अपने शिखर पर है।
ब्रह्म मुहूर्त समय:
आरम्भ = सूर्योदय - (2 × रात्रि मुहूर्त अवधि) ≈ सूर्योदय से 96 मिनट पहले
समाप्ति = सूर्योदय — यह अवधि ठीक भोर में समाप्त होती है
विषुव: ~4:24 से 6:00 | ग्रीष्म: ~3:30 से 5:00 | शीत: ~5:20 से 7:00
ये तीन अशुभ समय खण्ड प्रतिदिन आते हैं और नए कार्य आरम्भ करने से बचना चाहिए। राहु काल सबसे अधिक पालन किया जाता है — राहु द्वारा शासित ~90 मिनट की अवधि। दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है; राहु काल प्रत्येक सप्ताह के दिन अलग भाग में होता है। यमगण्ड यम द्वारा शासित है। गुलिक काल शनि के पुत्र गुलिक (मान्दि) द्वारा शासित है।
सप्ताह के दिन खण्ड स्थिति (दिवा 1-8)
| दिन | राहु काल | यमगण्ड | गुलिक |
|---|---|---|---|
| रवि | 8th | 5th | 7th |
| सोम | 2nd | 4th | 6th |
| मंगल | 7th | 3rd | 5th |
| बुध | 5th | 2nd | 4th |
| गुरु | 6th | 1st | 3rd |
| शुक्र | 4th | 7th | 2nd |
| शनि | 3rd | 6th | 1st |
चौघड़िया (शाब्दिक "चार घटिका" = विषुव पर ~96 मिनट) दिन और रात को प्रत्येक 8 खण्डों में बाँटता है। सात प्रकार एक निश्चित क्रम में चक्रित होते हैं: उद्वेग (सूर्य), चर (चन्द्र), लाभ (बुध), अमृत (गुरु), काल (शनि), शुभ (शुक्र), रोग (मंगल)। त्वरित दैनिक समय निर्णय के लिए: अमृत (सर्वोत्तम), शुभ और लाभ (अच्छा), चर (यात्रा के लिए स्वीकार्य)।
Amrit
गुरु
best
Shubh
शुक्र
good
Labh
बुध
good
Char
चन्द्र
travel
Udveg
सूर्य
avoid
Kaal
शनि
avoid
Rog
मंगल
avoid
होरा प्रणाली प्रत्येक दिन और रात को 12-12 ग्रह होराओं में बाँटती है (कुल 24), कल्डियन क्रम में शासित: शनि, गुरु, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध, चन्द्र। प्रत्येक दिन की पहली होरा उस दिन के स्वामी द्वारा शासित होती है। प्रत्येक कार्य की एक पसन्दीदा होरा होती है: सूर्य होरा — सरकारी कार्य, चन्द्र होरा — यात्रा, मंगल होरा — शल्य चिकित्सा, बुध होरा — व्यापार, गुरु होरा — धार्मिक कार्य, शुक्र होरा — विवाह, शनि होरा — भूमि कार्य।
कल्डियन क्रम (अवरोही कक्षा अवधि):
शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चन्द्र → (पुनः)
शनिवार के बाद रविवार क्यों?
शनिवार की 1ली होरा = शनि। 24 होरा गिनें → 25वीं (= अगले दिन की 1ली) = सूर्य → रविवार!
मुहूर्त चयन एक स्तरित प्रक्रिया है। सबसे व्यापक फ़िल्टर से शुरू करें: (1) मास/ऋतु — कुछ मास सार्वभौमिक अशुभ हैं। ग्रहण से बचें। (2) तिथि — प्रत्येक कार्य की पसन्दीदा तिथियाँ हैं। (3) नक्षत्र — स्थिर नक्षत्र नींव के लिए, चर यात्रा के लिए। (4) योग — व्यतीपात और वैधृति से बचें। (5) वार — कार्य के ग्रह से मिलाएँ। (6) राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल से बचें। (7) चौघड़िया/होरा से सूक्ष्म समायोजन। (8) उन्नत: चन्द्र बलम, तारा बलम, लग्न शुद्धि जाँचें।
त्वरित मुहूर्त जाँचसूची:
1. कोई ग्रहण नहीं, अधिक मास नहीं
2. कार्य के लिए उचित तिथि
3. उपयुक्त नक्षत्र (स्थिर/चर/द्वि)
4. व्यतीपात या वैधृति योग नहीं
5. मेल खाता वार (सप्ताह का दिन)
6. राहु काल, यमगण्ड, गुलिक से बाहर
7. अनुकूल चौघड़िया (अमृत/शुभ/लाभ)
8. कार्य प्रकार के लिए सही होरा