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विंशोत्तरी से परे: 36 वर्षीय योगिनी चक्र और घटना पुष्टि के लिए जैमिनी की राशि-आधारित चर दशा
जहाँ विंशोत्तरी पाराशरी ज्योतिष की प्राथमिक दशा पद्धति है, वहीं योगिनी दशा नाटकीय रूप से छोटे चक्र वाला एक शक्तिशाली पूरक उपकरण है। आठ योगिनियाँ — ब्रह्माण्डीय स्त्री शक्तियाँ — 36 वर्ष का काल विभाजित करती हैं: मंगला (1 वर्ष, चन्द्र), पिंगला (2 वर्ष, सूर्य), धन्या (3 वर्ष, गुरु), भ्रामरी (4 वर्ष, मंगल), भद्रिका (5 वर्ष, बुध), उल्का (6 वर्ष, शनि), सिद्धा (7 वर्ष, शुक्र), और संकटा (8 वर्ष, राहु)। योग: 1+2+3+4+5+6+7+8 = 36 वर्ष।
विंशोत्तरी की भाँति, आरम्भिक योगिनी चन्द्रमा के जन्म नक्षत्र से निर्धारित होती है। सूत्र: नक्षत्र संख्या (अश्विनी=1, भरणी=2...) में 3 जोड़ें, 8 से भाग दें — शेषफल आरम्भिक योगिनी बताता है। चूँकि चक्र मात्र 36 वर्ष का है, यह जीवनकाल में 2-3 बार दोहराता है, विंशोत्तरी भविष्यवाणियों के सत्यापन हेतु एक भिन्न "घड़ी" प्रदान करता है। जहाँ विंशोत्तरी व्यापक कथा देती है, वहीं योगिनी शीघ्र, सटीक पुष्टि देती है।
Mangala (1 yr, Moon) — Auspiciousness, new beginnings, emotional sensitivity.Pingala (2 yr, Sun) — Vitality, authority, father-related events.Dhanya (3 yr, Jupiter) — Prosperity, wisdom, expansion of fortune.Bhramari (4 yr, Mars) — Energy, conflicts, property, courage.
Bhadrika (5 yr, Mercury) — Communication, trade, intelligence.Ulka (6 yr, Saturn) — Meteoric falls, hardship, karmic debts.Siddha (7 yr, Venus) — Accomplishment, relationships, luxury.Sankata (8 yr, Rahu) — Obstacles, obsession, unconventional paths.