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देवी लक्ष्मी, भगवान राम, भगवान गणेश
भगवान राम 14 वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद अयोध्या लौटे। नागरिकों ने हज़ारों दीप जलाकर उनका स्वागत किया। एक अन्य परम्परा में, लक्ष्मी समुद्र मन्थन से इसी रात्रि प्रकट हुईं।
प्रकाश का त्योहार — अन्धकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, बुराई पर अच्छाई की विजय। सबसे अन्धेरी रात (अमावस्या) को प्रकाशित किया जाता है।
पाँच दिनों का उत्सव: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली (लक्ष्मी पूजा, दीप जलाएँ), गोवर्धन पूजा, भाई दूज। घर की सफाई, रंगोली, नए वस्त्र।
लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) और निशीथ काल (मध्यरात्रि) में की जाती है। सबसे शुभ समय अमावस्या की रात सामान्यतः शाम 6 से 8 बजे के बीच होता है।
इस शुभ कार्तिक अमावस्या (दिवाली) पर, अपने गृह में धन, समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति के लिए, मैं माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करता/करती हूँ।
पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। लक्ष्मी मूर्ति/चित्र बीच में पूर्वमुखी रखें, गणेश उनकी बाईं ओर। मूर्तियों के पास सिक्के, बही खाता और कलम रखें।
विष्णु के नामों का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से तीन बार जल का आचमन करें।
दाहिने हाथ में जल और अक्षत लेकर, तिथि, स्थान और लक्ष्मी-गणेश पूजा का उद्देश्य बोलकर जल छोड़ें।
सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें (परम्परानुसार किसी भी पूजा से पहले)। कुमकुम, अक्षत, दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें। गणेश बीज मन्त्र का जाप करें।
गणेश बीज मन्त्र
ॐ गं गणपतये नमः
हाथ जोड़कर मूर्ति/चित्र में माता लक्ष्मी का आवाहन करें। लक्ष्मी बीज मन्त्र पढ़ते हुए अक्षत और कमल के फूल अर्पित करें।
लक्ष्मी बीज मन्त्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
माता लक्ष्मी को पैर धोने के लिए जल (पाद्य) और सुगन्धित जल अर्घ्य के रूप में अर्पित करें।
लक्ष्मी मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ।
लक्ष्मी जी को लाल साड़ी/कपड़ा अर्पित करें। उपलब्ध हो तो आभूषण भी सजाएँ।
लक्ष्मी मूर्ति पर चन्दन का लेप और कुमकुम लगाएँ।
माता लक्ष्मी को कमल और अन्य लाल/गुलाबी फूल अर्पित करें। कमल उनका सबसे प्रिय पुष्प है।
अगरबत्ती जलाकर लक्ष्मी और गणेश दोनों मूर्तियों के सामने घुमाएँ।
सभी 13 घी के दीपक जलाएँ। उन्हें पूजा स्थल के चारों ओर रखें। एक दीपक देवताओं के सामने दक्षिणावर्त घुमाएँ।
ऋग्वेद से श्री सूक्त का पाठ करें — दिवाली लक्ष्मी पूजा में यह सबसे महत्वपूर्ण पाठ है।
श्री सूक्त (प्रथम मन्त्र)
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
माला से लक्ष्मी बीज मन्त्र 108 बार जपें। समृद्धि और धन पर ध्यान केन्द्रित करें।
लक्ष्मी बीज मन्त्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
मूर्ति के पास सिक्के रखकर कुबेर (दिव्य कोषाध्यक्ष) की पूजा करें और कुबेर मन्त्र का जाप करें। इससे धन का निरन्तर प्रवाह सुनिश्चित होता है।
कुबेर मन्त्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा
मिठाई (खीर, लड्डू, बर्फी), फल और नारियल नैवेद्य के रूप में अर्पित करें। भोग के चारों ओर जल छिड़कें।
पान, सुपारी और लौंग ताम्बूल के रूप में अर्पित करें।
नया बही खाता लक्ष्मी मूर्ति के सामने रखें। नई लाल कलम से पहले पन्ने पर "श्री" या "शुभ लाभ" लिखें। उस पर कुमकुम और अक्षत लगाएँ।
कपूर और घी के दीपक से "ॐ जय लक्ष्मी माता" गाते हुए आरती करें। घण्टी बजाएँ और शंख फूँकें।
पूजा स्थल की 3 बार दक्षिणावर्त परिक्रमा करें।
समृद्धि की प्रार्थना करते हुए दोनों हाथों से पुष्प अर्पित करें। प्रणाम कर आशीर्वाद माँगें।
पूजा के बाद, दरवाजे, खिड़कियों, बालकनी, तुलसी के पौधे और घर के हर कमरे में जलते दीपक रखें। पूरा घर दीपों से जगमगाना चाहिए।
लक्ष्मी बीज मन्त्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
oṃ śrīṃ mahālakṣmyai namaḥ
शुभ और धन प्रदान करने वाली महान देवी लक्ष्मी को नमन
108x जप संख्याश्री सूक्त (प्रथम मन्त्र)
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
oṃ hiraṇyavarṇāṃ hariṇīṃ suvarṇarajatasrajām | candrāṃ hiraṇmayīṃ lakṣmīṃ jātavedo ma āvaha ||
हे जातवेद (अग्नि), उस लक्ष्मी को मेरे पास लाओ जो सुवर्ण वर्ण वाली, हरिणी के समान, स्वर्ण-रजत माला धारिणी, चन्द्र समान कान्तिमती और हिरण्मयी हैं।
गणेश बीज मन्त्र
ॐ गं गणपतये नमः
oṃ gaṃ gaṇapataye namaḥ
विघ्नहर्ता भगवान गणपति को नमन
कुबेर मन्त्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा
oṃ yakṣāya kuberāya vaiśravaṇāya dhanadhānyādhipataye dhanadhānyasamṛddhiṃ me dehi dāpaya svāhā
हे कुबेर, यक्षों के स्वामी, विश्रवण के पुत्र, धन-धान्य के अधिपति — मुझे धन-धान्य की समृद्धि प्रदान करें।
दीप मन्त्र
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदम्। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
śubhaṃ karoti kalyāṇamārogyaṃ dhanasampadam | śatrubuddhivināśāya dīpajyotirnamo'stu te ||
दीपक का प्रकाश शुभ, कल्याण, स्वास्थ्य और धन-सम्पदा लाता है। यह शत्रुओं की बुद्धि का नाश करता है। दीप की ज्योति को नमन।
श्री सूक्त
ऋग्वेद से लक्ष्मी का प्रमुख वैदिक सूक्त। दिवाली पूजा का सबसे महत्वपूर्ण पाठ।
लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली
देवी लक्ष्मी के 108 नाम। प्रत्येक नाम पर पुष्प या कुमकुम अर्पित करते हुए पढ़ें।
॥ श्री लक्ष्मी माता की आरती ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता। खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
|| śrī lakṣmī mātā kī āratī || oṃ jaya lakṣmī mātā, maiyā jaya lakṣmī mātā | tumako niśadina sevata, hari viṣṇu vidhātā || oṃ jaya lakṣmī mātā || umā ramā brahmāṇī, tuma hī jaga mātā | sūrya candramā dhyāvata, nārada ṛṣi gātā || oṃ jaya lakṣmī mātā || durgā rūpa niraṃjani, sukha sampatti dātā | jo koī tumako dhyāvata, ṛddhi siddhi dhana pātā || oṃ jaya lakṣmī mātā || tuma pātāla nivāsini, tuma hī śubhadātā | karma prabhāva prakāśini, bhavanidhi kī trātā || oṃ jaya lakṣmī mātā || jisa ghara meṃ tuma rahatīṃ, saba sadguṇa ātā | saba sambhava ho jātā, mana nahīṃ ghabarātā || oṃ jaya lakṣmī mātā || tuma bina yajña na hove, vastra na koī pātā | khāna pāna kā vaibhava, saba tumase ātā || oṃ jaya lakṣmī mātā || mahālakṣmī jī kī āratī, jo koī jana gātā | ura ānanda samātā, pāpa utara jātā || oṃ jaya lakṣmī mātā ||
खीर, लड्डू, बर्फी, ताजे फल, पूरा नारियल, मेवे, बताशे और विशेष रूप से बनी मिठाइयाँ
धन और समृद्धि की प्राप्ति, गरीबी और आर्थिक कठिनाइयों का निवारण, घर में लक्ष्मी का स्थायी निवास, व्यापार और करियर में सफलता, और परिवार का सम्पूर्ण कल्याण