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विश्व की सबसे प्राचीन खगोलीय परम्परा — जहाँ अनुष्ठान की सूक्ष्मता ने वैज्ञानिक खोज को जन्म दिया।
वेदाङ्ग = "वेद का अंग।" ज्योतिष छः वेदाङ्गों में से एक है — और इसे सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
"जैसे मयूर के शीश पर शिखा, जैसे नाग के फन पर मणि, वैसे ही वेदाङ्गों के शीर्ष पर ज्योतिष विराजमान है।"
लगध (~1400 ई.पू., कुछ विद्वान ~500 ई.पू. मानते हैं) को इसका रचयिता माना जाता है। इसमें 5-वर्षीय युग चक्र, अयनान्त अवलोकन, और अधिमास नियम हैं।
यह "ज्योतिष" (फलित ज्योतिष) नहीं है — यह शुद्ध प्रेक्षणात्मक खगोल विज्ञान है, जो यज्ञ और अनुष्ठान के सही समय निर्धारण के लिए विकसित हुआ।
इन प्रतिभाओं ने न केवल भारतीय विज्ञान को, बल्कि सम्पूर्ण मानव ज्ञान को आकार दिया।
"जैसे नाव में बैठा व्यक्ति स्थिर वस्तुओं को पीछे जाते देखता है, वैसे ही स्थिर तारे पश्चिम की ओर गतिमान दिखते हैं।"
"वस्तुएँ पृथ्वी की ओर गिरती हैं क्योंकि पृथ्वी का स्वभाव वस्तुओं को आकर्षित करना है, जैसे जल का स्वभाव बहना है।"
3,000 वर्षों का निरन्तर खगोलीय अन्वेषण — विश्व में अद्वितीय।
| अवधारणा | भारत | पश्चिम | अन्तर |
|---|---|---|---|
| पृथ्वी धुरी पर घूमती है | Aryabhata, 499 CE | Copernicus, 1543 CE | 1,044 yrs |
| पृथ्वी की परिधि (99.8%) | Aryabhata, 499 CE | Eratosthenes, 240 BCE | Parallel |
| ज्या (Sine) फलन | Aryabhata, 499 CE | Latin sinus via Arabic | Origin |
| शून्य एक संख्या के रूप में | Brahmagupta, 628 CE | Europe via Al-Khwarizmi, ~825 CE | ~200 yrs |
| पाई की अनन्त श्रेणी | Madhava, ~1400 CE | Gregory-Leibniz, ~1670 CE | 270 yrs |
| ऋण संख्याएँ | Brahmagupta, 628 CE | Europe, ~1200s CE | ~600 yrs |
| गुरुत्वाकर्षण अवधारणा | Brahmagupta, 628 CE | Newton, 1687 CE | 1,059 yrs |
| कलनशास्त्र अवधारणाएँ | Madhava, ~1400 CE | Newton/Leibniz, ~1680 CE | ~280 yrs |
| अर्ध-सूर्यकेन्द्रित मॉडल | Nilakantha, ~1500 CE | Copernicus, 1543 CE | ~40 yrs |
| दशमलव प्रणाली | Bhaskara I, ~600 CE | Fibonacci, 1202 CE | ~600 yrs |
शब्द यात्रा: अर्ध-ज्या → ज्या → अरबी "जीब" → लैटिन "sinus" → अंग्रेज़ी "sine"। हर बार जब कोई "sine" कहता है, वह संस्कृत बोल रहा है।
भारतीय गणित और खगोल विज्ञान अरब विद्वानों के माध्यम से यूरोप तक कैसे पहुँचा — यह ज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है।
आर्यभट, ब्रह्मगुप्त, भास्कर — दशमलव, शून्य, बीजगणित, त्रिकोणमिति, खगोल
अल-ख़्वारिज़्मी ने भारतीय ग्रन्थों से सीखा — उनके नाम से "algorithm" बना। अल-बिरूनी (1030 ई.) ने भारत यात्रा की, तारीख़-उल-हिन्द लिखी।
फ़िबोनाची की लिबेर अबाची (1202) ने "अरबी" अंक प्रस्तुत किए — जो वास्तव में अरब के माध्यम से आए भारतीय अंक थे।
"Arabic numerals" = भारतीय अंक जो अरब के रास्ते गए। "Algorithm" = अल-ख़्वारिज़्मी = जिन्होंने भारतीय गणितज्ञों से सीखा। आधुनिक गणित की नींव भारत में रखी गई।