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आपकी पहली साँस के क्षण में जमा हुआ आकाशीय चित्र
कुण्डली (जन्म पत्रिका) आपके जन्म के सटीक क्षण और स्थान पर आकाश का एक सटीक नक्शा है। कल्पना कीजिए कि जन्म के क्षण में आप बाहर खड़े होकर क्षितिज से क्षितिज तक पूरे आकाश का चित्र खींच रहे हैं — कुण्डली उसी चित्र का ज्यामितीय रूपांतरण है।
कुण्डली में तीन मूलभूत तत्व होते हैं: 12 भाव जो जीवन के क्षेत्र दर्शाते हैं, 12 राशियाँ जो पृष्ठभूमि प्रदान करती हैं, और 9 ग्रह — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — जो इनमें स्थापित होते हैं। लग्न (जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदय होने वाली राशि) पूरी संरचना का आधार है।
कुण्डली निर्माण की प्रणाली बृहत् पराशर होरा शास्त्र (BPHS) में संहिताबद्ध है, जो ऋषि पराशर (~1500 ई.पू.) को श्रेय दी जाती है। अध्याय 2 में राशिचक्र, अध्याय 3 में ग्रह स्वभाव, और अध्याय 4-5 में भाव निर्माण वर्णित है। वराहमिहिर की बृहत् जातक (छठी शताब्दी) ने गणना विधियों को परिष्कृत किया।
उत्तर भारतीय (हीरा): 12 भाव हीरे के आकार में स्थिर होते हैं। शीर्ष हीरा सदैव प्रथम भाव (लग्न) होता है। राशियाँ घूमती हैं — यदि लग्न वृषभ है, तो शीर्ष हीरे में वृषभ, अगले में मिथुन, इत्यादि। इस शैली से भाव संबंध एक नज़र में दिखते हैं।
दक्षिण भारतीय (ग्रिड): एक 4x4 ग्रिड जहाँ राशियाँ स्थायी रूप से स्थिर हैं — मीन सदैव ऊपर-बाएँ, मेष अगला, इत्यादि। भाव लग्न राशि के अनुसार घूमते हैं। इससे विभिन्न कुण्डलियों में ग्रहों की राशि स्थिति की तुलना करना सरल होता है।