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उगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आती है — दक्कन क्षेत्र में हिन्दू चान्द्र नववर्ष का पहला दिन। मुख्य पूजा प्रातः (पूर्व मध्याह्न) 6 AM से 12 PM के बीच की जाती है। पञ्चाङ्ग श्रवणम् (नववर्ष के पञ्चाङ्ग का श्रवण) इसी समय में होना चाहिए। अभ्यङ्ग स्नान (तेल स्नान) सूर्योदय से पहले किया जाता है।
इस पवित्र उगादि दिवस, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नए संवत्सर के आरम्भ पर, समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख से परिपूर्ण वर्ष के लिए सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और पालनकर्ता विष्णु का आशीर्वाद माँगते हुए यह पूजा करता/करती हूँ। मैं जीवन के छह रसों — मीठा, खट्टा, कड़वा, नमकीन, तीखा और कसैला — को समभाव से स्वीकार करता/करती हूँ।
सूर्योदय से पहले पूरे शरीर और सिर पर गर्म तिल का तेल लगाएँ। कम से कम 15 मिनट अच्छी तरह मालिश करें। फिर गर्म पानी से स्नान करें। यह उगादि की प्रिय परम्परा है — तेल स्नान शरीर को शुद्ध करता है, रक्त संचार बढ़ाता है, और नई ऊर्जा के साथ नए वर्ष के लिए तैयार करता है। स्नान के बाद माथे पर कुमकुम लगाएँ। नए कपड़े पहनें।
घर के मुख्य द्वार पर ताज़े आम के पत्तों का तोरण बाँधें। यह उगादि की अनिवार्य परम्परा है जो समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। चावल के आटे और रंगीन पाउडर से द्वार पर रंगोली (मुग्गु/कोलम) डिज़ाइन बनाएँ। पूजा कक्ष साफ कर ताज़े श्वेत कपड़े से वेदी सजाएँ। वेदी पर पञ्चाङ्ग (नववर्ष का पत्रा) रखें।
उगादि पचड़ी तैयार करें — छह स्वादों (षड्रस) वाला विशेष व्यञ्जन जो जीवन की छह भावनाओं का प्रतीक है। नीम के फूल/पत्ते (कड़वा — दुःख), गुड़ (मीठा — सुख), कच्चा आम (खट्टा — आश्चर्य), इमली का रस (तीखा खट्टा — घृणा), हरी मिर्च/काली मिर्च (तीखा — क्रोध), और नमक (नमकीन — भय) मिलाएँ। प्रत्येक परिवार सदस्य एक चम्मच खाए। यह सिखाता है कि नया वर्ष सभी अनुभव लाएगा और उन्हें समभाव से स्वीकार करना चाहिए। कर्नाटक में इसे बेवु-बेल्ला, आन्ध्र/तेलंगाना में उगादि पचड़ी कहते हैं।
वेदी पर घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ। भगवान ब्रह्मा और विष्णु के चित्र रखें। फूल, अक्षत, कुमकुम और फल अर्पित करें। उगादि उस दिन का उत्सव है जब ब्रह्मा ने सृष्टि आरम्भ की — उनकी सृजनात्मक शक्ति का आवाहन करें। विष्णु की भी सृष्टि को आगे ले जाने वाले पालनकर्ता के रूप में पूजा करें। नए संवत्सर का नाम, तिथि और वर्ष की प्रार्थना बोलकर संकल्प करें। विष्णु सहस्रनाम या कम से कम विष्णु गायत्री का पाठ करें।
विष्णु गायत्री मन्त्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्
यह उगादि का सबसे विशिष्ट अनुष्ठान है। पुरोहित या परिवार के सबसे बड़े सदस्य नए वर्ष का पञ्चाङ्ग जोर से पढ़ते हैं — नए संवत्सर का नाम, उस दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, और वर्ष भर की वर्षा, फसल, राजनीतिक मामलों और समृद्धि की भविष्यवाणी। पूरा परिवार ध्यानपूर्वक सुनता है। मन्दिरों में यह सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में भव्य समारोह होता है। पठन शासक ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर नए वर्ष का पूर्वानुमान बताता है।
तैयार किए गए उगादि विशेष व्यञ्जन नैवेद्य के रूप में अर्पित करें: पुलिहोरा (इमली चावल), बोब्बट्टू/ओब्बट्टू (मीठी भरवाँ रोटी), उगादि पचड़ी और नारियल चावल। कपूर जलाकर आरती करें। देवताओं के सामने ज्योत घुमाते हुए घण्टी बजाएँ। सभी परिवारजन आरती में भाग लें। आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।
भव्य उगादि भोज केले के पत्तों पर परोसा जाता है। पारम्परिक भोजन में पुलिहोरा, बोब्बट्टू/होलिगे, उगादि पचड़ी, पायसम, साम्बर और रसम के साथ चावल, दही चावल, और विभिन्न चटनियाँ और अचार शामिल हैं। भोजन में सभी छह स्वाद होने चाहिए। बड़ों के दर्शन कर आशीर्वाद लें। नववर्ष की शुभकामनाएँ दें — "उगादि शुभाकांक्षलु" (तेलुगु) या "युगादि हब्बद शुभाशयगळु" (कन्नड)। शाम को मन्दिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और हरिकथा का आयोजन होता है।
विष्णु गायत्री मन्त्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्
oṃ nārāyaṇāya vidmahe vāsudevāya dhīmahi tanno viṣṇuḥ pracodayāt
हम नारायण का ध्यान करते हैं, वासुदेव का चिन्तन करते हैं। वह विष्णु नए वर्ष में हमें प्रेरित और मार्गदर्शित करे।
108x जप संख्याब्रह्मा मन्त्र (सृष्टि हेतु)
ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारूढाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्
oṃ caturmukhāya vidmahe haṃsārūḍhāya dhīmahi tanno brahmā pracodayāt
हम चतुर्मुख का ध्यान करते हैं, हंस पर आसीन का चिन्तन करते हैं। ब्रह्मा हमारे सृजनात्मक प्रयासों को प्रेरित और मार्गदर्शित करे।
11x जप संख्याविष्णु सहस्रनाम (चयनित)
भगवान विष्णु के सहस्र नाम। उगादि पर पाठ पूरे वर्ष सुरक्षा और समृद्धि लाता है।
उगादि पचड़ी (छह रसों का मिश्रण), पुलिहोरा (इमली चावल), बोब्बट्टू/ओब्बट्टू (चने की दाल और गुड़ भरी मीठी रोटी), नारियल चावल, दही चावल, पायसम (खीर), लड्डू, और मौसमी फल — आम, केला, नारियल।
सृजनात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत के लिए ब्रह्मा जी का आशीर्वाद। पूरे वर्ष सुरक्षा और पालन-पोषण के लिए विष्णु भगवान का आशीर्वाद। जीवन के सुख-दुःख को समभाव से सहना (बेवु-बेल्ला की शिक्षा)। पञ्चाङ्ग श्रवणम् से वर्ष के ग्रह प्रभावों का ज्ञान। समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और सामंजस्यपूर्ण पारिवारिक जीवन।