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आर्यभट ने 499 ई. में विश्व की पहली ज्या सारणी कैसे बनाई, "ज्या" का क्या अर्थ है, और किस अनुवाद-श्रृंखला से अंग्रेजी को "sine" शब्द मिला
499 ई. में, एक 23 वर्षीय भारतीय गणितज्ञ ने एक ऐसी सारणी बनाई जो खगोल विज्ञान, नौवहन और आखिरकार सभी आधुनिक इंजीनियरिंग की नींव बन गई। आर्यभट की ज्या सारणी — जिसे हम आज sine table कहते हैं — न केवल विश्व में पहली थी, बल्कि अगले हजार वर्षों तक सबसे सटीक भी रही।
धनुष का रूपक: एक वृत्त को धनुष की भाँति कल्पना करें। कोण = चाप (धनुष की वक्रता)। जीवा = डोरी जो चाप के दोनों सिरों को जोड़ती है। अर्धज्या = जीवा का आधा भाग = आधुनिक sine।
यूनानियों से अन्तर: ग्रीक गणितज्ञ पूर्ण जीवाओं की सारणी बनाते थे। भारतीयों ने अर्ध-जीवा (ज्या) का उपयोग किया — जो दोगुना सुरुचिपूर्ण और गणना में अधिक सरल है। जीवा(θ) = 2 × ज्या(θ/2)।
सारणी की संरचना: 24 मान, 3.75° के अन्तराल पर (3°45\' या 225 चापमिनट)। त्रिज्या R = 3438 चापमिनट (एक रेडियन ≈ 3438 चापमिनट)। मान रोलर कोस्टर की तरह आरोही हैं: 225, 449, 671, 890... 3438।
आर्यभट ने 24 ज्या अन्तर-मानों को मात्र 4 श्लोकों में समाया — संस्कृत व्यञ्जन-स्वर जोड़ियों की एक अद्भुत प्रणाली का उपयोग करके। प्रत्येक अक्षर एक विशिष्ट संख्यात्मक मान का प्रतिनिधित्व करता था। यह प्रणाली (जिसे आर्यभट कटपयादि के पूर्वज के रूप में देखते हैं) पूरी सारणी को एक छोटे से स्मृति-सहायक में संकुचित कर देती थी।