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बङ्गालपञ्जिका बङ्गालभाषिजनानां पारम्परिकं पञ्चाङ्गम्। १९६६ तमे वर्षे डॉ. मेघनादसाहामहोदयस्य नेतृत्वे संशोधितं आधुनिकबङ्गालपञ्चाङ्गं सुधारितसौरपञ्चाङ्गम् अस्ति।
साहापञ्चाङ्गसंशोधनानन्तरं प्रथमपञ्चमासेषु (बैशाखात् भाद्रपर्यन्तम्) ३१ दिनानि शेषसप्तमासेषु ३० दिनानि भवन्ति।
| # | मास | বাংলা | ग्रेगोरियन | दिन |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बैशाख | বৈশাখ | Apr 14 – May 14 | 31 |
| 2 | ज्येष्ठ | জ্যৈষ্ঠ | May 15 – Jun 14 | 31 |
| 3 | आषाढ़ | আষাঢ় | Jun 15 – Jul 15 | 31 |
| 4 | श्रावण | শ্রাবণ | Jul 16 – Aug 15 | 31 |
| 5 | भाद्र | ভাদ্র | Aug 16 – Sep 15 | 31 |
| 6 | आश्विन | আশ্বিন | Sep 16 – Oct 15 | 30 |
| 7 | कार्तिक | কার্তিক | Oct 16 – Nov 14 | 30 |
| 8 | अग्रहायण | অগ্রহায়ণ | Nov 15 – Dec 14 | 30 |
| 9 | पौष | পৌষ | Dec 15 – Jan 13 | 30 |
| 10 | माघ | মাঘ | Jan 14 – Feb 12 | 30 |
| 11 | फाल्गुन | ফাল্গুন | Feb 13 – Mar 14 | 30 |
| 12 | चैत्र | চৈত্র | Mar 15 – Apr 13 | 30 |
पहला बैशाख (बंगाली नव वर्ष — हालखाता, मंगल शोभायात्रा), रवीन्द्र जयन्ती (25 बैशाख)
जामाई षष्ठी (दामाद दिवस), फलहारिणी काली पूजा
रथ यात्रा (जगन्नाथ रथ — कोलकाता, महेश, श्रीरामपुर में भव्य), उल्टो रथ
झूलन यात्रा, नाग पंचमी, रक्षा बंधन, मनसा पूजा (सर्प देवी)
जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा (कारखानों में उपकरण पूजा), गणेश चतुर्थी
महालया (महिषासुर मर्दिनी पाठ), दुर्गा पूजा (षष्ठी से दशमी — बंगाल का सबसे बड़ा उत्सव), लक्ष्मी पूजा (शरद पूर्णिमा)
काली पूजा / दीवाली, भाई फोंटा (बहन भाई को टीका), जगद्धात्री पूजा (चन्दननगर)
नबान्न (नई धान का उत्सव), जगद्धात्री पूजा विसर्जन
पौष संक्रान्ति / मकर संक्रान्ति (पौष मेला, पीठे-पुली मिठाइयां)
सरस्वती पूजा (वसन्त पंचमी — छात्र विद्या की देवी की पूजा, पीले वस्त्र), माघी पूर्णिमा
दोल यात्रा / होली (राधा-कृष्ण झूला), महा शिवरात्रि
चैत्र संक्रान्ति (बंगाली वर्ष का अन्तिम दिन — चड़क पूजा), बासन्ती पूजा (वसन्त दुर्गा पूजा)
प्रथमबैशाखः (एप्रिल-मासस्य १४-१५ दिनाङ्के) बङ्गालनववर्षम् अस्ति। "मङ्गलशोभायात्रा" "प्रभातफेरी" च दिनम् आरभ्यते।
दुर्गापूजा बङ्गाले केवलं पर्व नास्ति — वर्षस्य परिभाषितसांस्कृतिकघटना अस्ति, दशदिनात्मकम् उत्सवः। महालयातः (आश्विनामावस्यायाः) दशमीपर्यन्तम् उत्सवः प्रचलति।
बङ्गालपञ्जिका अन्यभारतीयपञ्चाङ्गपद्धतिभ्यः बहुविधं भिन्ना। बङ्गालवर्षं (बङ्गाब्दम्) प्रथमबैशाखे आरभ्यते। १९६६ तमस्य साहासंशोधनं बङ्गालपञ्चाङ्गं वैज्ञानिकतमं हिन्दूपञ्चाङ्गं करोति।