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Thursday, 14 May 2026
21.19°N, 81.28°E · Asia/Kolkata (UTC+5.5)
Today's Panchang for Durg-Bhilai, Chhattisgarh – accurate sunrise, sunset, tithi, nakshatra, yoga, and karana timings computed for Durg-Bhilai's exact coordinates (21.19°N, 81.28°E). All Vedic calendar elements are calculated using the Lahiri Ayanamsha and Meeus astronomical algorithms for sub-arcsecond accuracy. This page updates daily with Durg-Bhilai's local timings, including Rahu Kaal, Yamaganda Kaal, and Gulika Kaal – essential for planning auspicious activities.
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सभी मान दुर्ग-भिलाई के सटीक निर्देशांकों से गणना किए गए हैं। कोई सन्निकटन या डिफ़ॉल्ट नहीं।
तिथि संक्रमण समय 30-पुनरावृत्ति द्विभाजन खोज से निर्धारित, ~1 सेकंड सटीकता। सूर्योदय/सूर्यास्त मीउस एल्गोरिदम (2-पास) + वायुमण्डलीय अपवर्तन।
All endeavors succeed – auspicious vara-nakshatra combination
ग्रह स्थिति, चौघड़िया, होरा, दिशा शूल – दुर्ग-भिलाई के लिए सब कुछ
Full Panchangदुर्ग-भिलाई (Chhattisgarh) के लिए दैनिक वैदिक पंचांग – प्रत्येक दिन दुर्ग-भिलाई के अक्षांश 21.19°N और देशांतर 81.28°E के अनुसार सटीक गणना। पंचांग के पाँच अंग – तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण – शुभ मुहूर्त चयन और दैनिक धार्मिक कृत्यों के लिए अनिवार्य हैं।
सभी गणनाएँ लाहिरी अयनांश (चित्रपक्ष) पर आधारित हैं, जो भारत के अधिकांश पंचांग कर्ताओं द्वारा प्रयुक्त होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय दुर्ग-भिलाई के भौगोलिक निर्देशांक और Asia/Kolkata समय क्षेत्र के अनुसार गणना किया गया है।
आज का दुर्ग-भिलाई का पंचांग **द्वादशी** तिथि, **रेवती** नक्षत्र और **प्रीति** योग से परिभाषित है। कृष्ण पक्ष की घटती ऊर्जा चिंतन और पूर्णता के लिए अनुकूल।
दुर्ग-भिलाई में सूर्योदय 05:27 और सूर्यास्त 18:35 पर है। नीचे दिए गए समय दुर्ग-भिलाई के निर्देशांकों के अनुसार हैं।
तिथि: द्वादशी (कृष्ण पक्ष)
नक्षत्र: रेवती – आज चन्द्रमा की स्थिति आध्यात्मिकता और विश्राम को प्रभावित करती है।
योग: प्रीति
वार: गुरुवार
राहु काल 13:39 से 15:18 तक है – इस अवधि में महत्वपूर्ण नए कार्य न करें।
वर्ज्यम् काल 11:25 से 12:54 तक सक्रिय है। इस समय नए कार्य न करें।
अमृत काल 20:20 से 21:49 तक है – महत्वपूर्ण निर्णयों, अनुष्ठानों और नए कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय।
यमगण्ड: 05:27–07:05
द्वादशी और रेवती का संयोग आज चल रहे कार्यों को पूरा करने, ऋण चुकाने और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए उपयुक्त बनाता है।
अपने स्थान के अनुसार व्यक्तिगत पंचांग के लिए देखो पंचांग पर जाएं।