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14म शताब्दीमे सायण सूर्यप्रकाशक वेग उल्लेख कयलथि — आधुनिक गणनाक निकटक मूल्य
सायण (14म शताब्दी) विजयनगर साम्राज्यक प्रसिद्ध वेद भाष्यकार। हुनकर ऋग्वेद भाष्यमे सूर्यप्रकाशक वेग सूचित करयवाला एकटा श्लोक अछि।
Sayana, Rigveda-Samhita-Bhasya, on 1.50.4 (~1375 CE)
संस्कृत श्लोक: "योजनानां सहस्रे द्वे द्वे शते द्वे च योजने / एकेन निमिषार्धेन क्रमणे नमोस्तुते"
अनुवाद: "आधा निमेषमे 2,202 योजन पार करयवाला (सूर्यप्रकाशक) वेगकेँ नमस्कार"
1 योजन = लगभग 12.9 कि.मी. (आर्यभट्टक माप)। 2,202 योजन/अर्ध निमेष = लगभग 2,97,578 कि.मी./सेकेण्ड। आधुनिक प्रकाश वेग: 2,99,792 कि.मी./सेकेण्ड।
सायणक गणना 14म शताब्दीक, रोमर 1676 मे यूरोपमे पहिलबेर प्रकाशक वेग मापलथि। तीन शताब्दी पहिने भारतमे ई संख्या छल।
In Favor
पक्षमे तर्क: संख्या आश्चर्यजनक रूपसँ सटीक, योजन/निमेष एकक सुनिर्धारित।
Against
विपक्षमे तर्क: सायण खगोलशास्त्री नहि छलथि, ओ वेद भाष्यकार छलथि। ई संख्या संयोगसँ मिलल होइ सकैत अछि।
Our Assessment
जे किछु सत्य हो, ई संख्याक सटीकता (99.3%) उल्लेखनीय अछि।
रोमर (1676) प्रकाशक वेग 2,14,000 कि.मी./सेकेण्ड अनुमान कयलथि — 29% कम। सायणक संख्या रोमरसँ बहुत बेसी सटीक!
सायणक संख्या विवादास्पद रहलापर सेहो, ई वैदिक परम्परामे खगोलीय ज्ञानक गहिराइ देखबैत अछि।