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आर्यभटीय, गणितपाद, श्लोक 10। संक्षिप्त सूत्र शैलीमे लिखल, जतय एकटा पंक्ति एकटा पूरा गणितीय सत्यकेँ एन्कोड करैत अछि। यूरोपसँ 1,100 साल पहिने।
गणित सुंदर अछि। (100 + 4) × 8 + 62,000 = 62,832। परिधि ÷ व्यास = 62,832 ÷ 20,000 = 3.1416। आधुनिक π = 3.14159265... आर्यभट: 3.14160000... त्रुटि: 0.0001%।
आर्यभटक श्लोकक अंतिम शब्द "आसन्नः" अछि — "निकट" या "लगभग" अर्थ। हुनका बुझल छलनि जे π केँ भिन्न रूपमे सटीक रूपसँ व्यक्त नहि कयल जा सकैत अछि।
संगमग्रामक माधव (~1350 ई., केरल) ओ श्रृंखला व्युत्पन्न केलनि जेकरा यूरोप "लाइबनिज सूत्र" कहैत अछि। ओ π केँ 11 दशमलव स्थान धरि गणना केलनि।
1914मे श्रीनिवास रामानुजन π लेल असाधारण सूत्र प्रकाशित केलनि। प्रत्येक पद लगभग 8 सही दशमलव अंक जोड़ैत अछि।
शुल्बसूत्र (800–200 ईसा पूर्व) — वैदिक अग्नि वेदीसभक निर्माण नियमावली — वृत्तसँ वर्ग क्षेत्र रूपांतरण लेल π क सन्निकटन आवश्यक छल।
वैदिक खगोल विज्ञानमे प्रत्येक चाप-लंबाई गणना π क उपयोग करैत अछि। साइन तालिका R = 3438 त्रिज्याक इकाई वृत्त पर आधारित अछि। आर्यभटक π बिना, कोनो साइन तालिका नहि। साइन तालिका बिना, कोनो पंचांग नहि।