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लगभग 825 ई. मे, फ़ारसी गणितज्ञ अल-ख्वारिज्मी एकटा किताब लिखलनि: 'हिन्दू गणनाक अनुसार जोड़ आ घटावक किताब।' ई मौलिक गणितक काज नहि छल। ई स्पष्ट रूपसँ भारतीय गणितक अरबी दुनियामे संचरण छल।
अल-ख्वारिज्मीक काज भारतीय गणित ज्ञानक विश्वसनीय संचरण छल। ओ अनुवाद आ व्याख्या केलनि — आविष्कार नहि केलनि। हिन्दू दशमलव स्थान-मान प्रणाली ब्रह्मगुप्तक ब्रह्मस्फुटसिद्धान्तसँ (628 ई.) आयल।
भारतक गणित ज्ञान सुप्रलेखित शृंखलासँ पश्चिम दिशामे यात्रा केलक। भारतीय गणितज्ञ — आर्यभट, ब्रह्मगुप्त, भास्कर — मूल अवधारणा विकसित केलनि। बगदादक बैत अल-हिक्मामे अरबी विद्वान भारतीय ग्रन्थक अनुवाद केलनि।
आइ हम जे अंकक उपयोग करैत छी ओ यूरोपमे 'अरबी अंक' नामसँ जानल गेल किएक तँ यूरोपीय लोक ओकरा अरबी ग्रन्थसँ पाओलनि। मुदा अरब विद्वान कहियो एकर आविष्कार केनाइक दावा नहि केलनि। ओ एकरा 'हिन्दू अंक' कहलनि।
अल-ख्वारिज्मी स्पष्ट रूपसँ लिखलनि जे हुनकर अंकगणित विधि हिन्दू लोकसँ आयल छल। हुनकर बीजगणित किताब सेहो ब्रह्मगुप्तक भारतीय द्विघात समीकरण विधिक उपयोग केलक। 'एल्गोरिदम' शब्द हुनकर लैटिनीकृत नाम 'अल्गोरित्मी'सँ निकलल।
भारतीय गणित परम्परा जाहि पर अल-ख्वारिज्मी निर्माण केलनि ओ सदी-सदीमे मानव इतिहासक कतेक महान मस्तिष्कसँ निर्मित भेल छल।
आधुनिक गणितक नींव — अंक प्रणाली जे हम दैनिक उपयोग करैत छी, शून्यक अवधारणा, हर कंप्यूटरकेँ शक्ति देनाइ वाला एल्गोरिदम — सोझे प्राचीन भारतीय गणितज्ञसँ जुड़ैत अछि।