देहरादून · Uttarakhand
जन्माष्टमी 2028देहरादून मे
Exact puja times & muhurta computed for Dehradun coordinates (30.32°N, 78.03°E)
मुख्य समय
पर्वक तिथि
Sunday, August 13, 2028
सूर्योदय
05:43
सूर्यास्त
19:01
ई तिथि किएक?
निशिता काल (मध्यरात्रि) नियम: ओहि दिन मनाओल जाइत अछि जखन निशिता काल (लगभग ११:४० राति सँ १२:२८ भोर धरि) मे अष्टमी तिथि रहैत अछि। भगवान कृष्णक जन्म मथुराक कारागार मे मध्यरात्रिक क्षण मे भेल छल।
तिथि निर्धारणक नियम
The tithi must prevail during Nishita Kaal (midnight). Used for festivals like Maha Shivaratri and Janmashtami.
Source: Dharmasindhu & Nirnayasindhu – classical Kala-Vyapti system
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- बाल कृष्णक मूर्ति (बाल गोपाल)
- झूला (पालना/झूला)
- माखन (ताजा मक्खन)
- मिश्री (खण्ड)
- तुलसीक पत्ता
पूजाक चरण
- 1
निर्जला/फलाहार व्रत (दिनभरिक उपवास)
सूर्योदयसँ पूर्ण उपवास राखू। कठोर भक्तगण निर्जला (जल बिना) व्रत करैत छथि, जखन कि दोसर लोक फलाहार (फल, दूध, मेवा) ल' सकैत...
- 2
झूलाकेँ सजाऊ (पालना)
पालना/झूलाकेँ फूल, आमक पात आ रङ्ग-बिरङ्गक वस्त्रसँ सजाऊ। ओहिमे एकटा छोट गद्दा आ तकिया राखू। ई मध्यरात्रिमे बाल कृष्णक ले...
- 3
पूजा मण्डपक तैयारी
पूजा क्षेत्रकेँ कृष्णक प्रतिमा, मयूर पंख, बाँसुरी आ भोगक सामग्रीसँ सजाऊ। झूलाकेँ वेदीक समीप राखू। पञ्चामृतक सामग्री, माख...
व्रत फल (व्रतक लाभ)
भगवान कृष्णक प्रति परम भक्ति (प्रेम भक्ति), जन्म-मृत्युक चक्रसँ मुक्ति (मोक्ष), अनेक जन्मसँ संचित सभ पापसभक नाश, गोलोक (कृष्णक शाश्वत धाम) कऽ प्राप्ति, आ भगवान श्री कृष्ण – पूर्ण अवतार – कऽ भगवत् कृपा।
गणनाक प्रमाण – पारदर्शी लेखा परीक्षण
देवता
भगवान कृष्ण
कथा आ इतिहास
जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी कें मध्य रात्रि मे श्रीकृष्ण कें जन्म कें पर्व अछि, जखन चन्द्र रोहिणी नक्षत्र मे उदित छल। भागवत पुराण, विष्णु पुराण आ हरिवंश यह कथा एकसँग कहैत अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी कें मध्य रात्रि मे श्रीकृष्ण कें जन्म कें पर्व अछि, जखन चन्द्र रोहिणी नक्षत्र मे उदित छल। भागवत पुराण, विष्णु पुराण आ हरिवंश यह कथा एकसँग कहैत अछि।
समस्या देवकी-वसुदेव कें विवाह सँ शुरू होइत अछि। देवकी कें भाइ कंस, मथुरा कें राजा, बहीन कें स्नेह सँ स्वयं रथ हाँकैत अछि। आकाशवाणी होइत अछि जे देवकी कें अष्टम पुत्र ओकर वध करत। कंस तलवार उठबैत अछि; वसुदेव हस्तक्षेप कय कय प्रत्येक शिशु कें जन्म पर सौंपय कें वचन दैत छथि। कंस मानि लैत अछि मुदा दूनू कें कारागार मे बन्द कय दैत अछि। एक-एक कय कय छह सन्तान नष्ट कयल जाइत अछि। सातम बलराम योगमाया द्वारा रोहिणी कें गर्भ मे स्थानान्तरित कयल जाइत अछि। आठम गर्भ कृष्ण कें अछि।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी कें मध्य रात्रि मे, रोहिणी कें उदय कें संग, कृष्ण कें जन्म होइत अछि। ओ पहिने चतुर्भुज विष्णु रूप मे प्रकट होइत छथि, फेर शिशु रूप धारण कय वसुदेव कें गोकुल लय जाय कें निर्देश दैत छथि।
वसुदेव कें पैर कें बेड़ी खुलि जाइत अछि, द्वार स्वयं उघरि जाइत अछि, पहरेदार निद्रित भय जाइत छथि। यमुना उफनल अछि मुदा वसुदेव कें प्रवेश पर रास्ता दैत अछि। शेषनाग पाछाँ उठि कय शिशु कें वर्षा सँ ढाँकैत अछि।
मध्य रात्रि कें पूजा, छप्पन भोग, झूला झुलाओनाइ — सब कथा कें पुनरावृत्ति। अन्धकारतम घड़ी मे, कारागार मे, बाढ़ि मे — प्रकाश कें अवतरण।
कनाय पालन करब
मध्यरात्रि तक उपवास (कृष्ण का जन्म समय)। मध्यरात्रि में भजन-कीर्तन के साथ पूजा। 56 भोग तैयार करें। बाल कृष्ण की मूर्ति को झूला झुलाएँ।
महत्व
भगवद्गीता के वक्ता परमात्मा का जन्म। कृष्ण दिव्य प्रेम, ब्रह्माण्डीय ज्ञान और कर्मयोग के प्रतीक हैं।
व्रत
मध्यरात्रि तक कठोर व्रत। मध्यरात्रि पूजा के बाद प्रसाद से पारण।